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Rani Sati Dadi Mangal Path | श्री राणी सती दादी मंगल पाठ

Rani Sati Dadi

Rani Sati Dadi Mangal Path known as Shri Narayani Charitra Manas – A complete Rani Sati Dadi (Narayani devi) MangalPath. Rani Is Also Referred As Narayani Devi And Dadiji. Rani Sati Committed Sati On Her Husband’s Death. Rani Sati Was A Rajasthani Women Lived Sometime Between 13th And 17th Century. There are numerous temples that are dedicated to Rani Sati Dadi Ji. These include Rani Sati Dadi ji temple in Jhunjhunu, Narayani Sati temple in Alwar, Dholan Sati temple in Raipur and Rani Bhatiyani temple in Jasol.

श्री राणी सती दादी मंगल मनका १०८

जय अम्बे जय दुर्गे मात , जय नारायणी जय तनधन दास !!
जय दादी जय शक्ति नाम , पतित पावन दादी नाम !!

मनका

दीन हीन का दुख हरने को ! जन गण मंगल करने को !!
शक्ति प्रकटी झुन्झुन धाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१)

यह शक्ति है माँ जगदम्बा ! यही भवानी दुर्गे अम्बा !!
नारायणी है इसका नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (२)

पीढी दर पीढी का रिश्ता ! तब ही दादी नाम है इसका !!
कुलदेवी को करो प्रणाम ! पतित पावन दादी नाम !! (३)

है अमोध दादी की शक्ति ! सदियों से करते सब भक्ति !!
पूजते है त्रिशूल निशान ! पतित पावन दादी नाम !! (४)

माँ शक्ति का अलख जगाऊँ ! दादी माँ की बात बताऊँ !!
है स्वयं शक्ति दुर्गा महान ! पतित पावन दादी नाम !! (५)

जानत है सबही नर नारी ! युद्घ हुआ महाभारत भारी !!
था वोः धर्म कर्म संग्राम ! पतित पावन दादी नाम !! (६)

कौरव, पाण्डव हुई लडाई ! लीला प्रभु ने अजब दिखाई !!
बने सारथी स्वयं भगवान ! पतित पावन दादी नाम !! (७)

गीता में उपदेश दिया है ! जग को यह संदेश दिया है !!
कर्म करो, तज फल का ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (८)

जब जब धरती पे धर्म लुटेगा ! और पाप का कर्म बढेगा !!
अवतारेंगे श्री भगवान ! पतित पावन दादी नाम !! (९)

Rani Sati Mangal path

अभिमन्यु, अर्जुन का लाल ! मंडराया जब उसका काल !!
कूदा रण में वह बलवान ! पतित पावन दादी नाम !! (१०)

चक्रव्यूअह की लड़ी लडाई ! वीर गति अभिमन्यु पाई !!
गया वीर वह तो सुरधाम ! पतित पावन दादी नाम !! (११)

उत्तरा, अभिमन्यु की नारी ! पति धर्म का सत था भारी !!
उस देवी को करो प्रणाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१२)

देख पति परलोक सिधारे ! उत्तरा ने ये वचन उचारे !!
जीवन हुआ आज निष्प्राण ! पतित पावन दादी नाम !! (१३ )

जाऊ मै भी संग पति के ! खूब चढ़ा यह रंग मति पे !!
सत् से मै भी करूँ प्रयाण ! पतित पावन दादी नाम !! (१४)

देख नारी का हट आती भारी ! बोले प्रभु से सब नर नारी !!
करो समस्या का समाधान ! पतित पावन दादी नाम !! (१५)

प्रभु ने सबको यों समझाया ! छोड़ो सभी मोह और माया !!
होगा वही जो विधि विधान !पतित पावन दादी नाम !! (१६)

बोले फिर उत्तरा से जाय ! ऐसी घडी अभी नहीं आई !!
कर तू धर्म कर्म का ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (१७ )

तू है गर्भवती एक नारी ! फिर कैसे ये बात विचारी !!
सोच ले क्या होगा अंजाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१८)

अब ताजे जीवन पाप लगेगा ! कोख से तेरे निशाँ मिटेगा !!
नहीं है इसमें तेरी शान ! पतित पावन दादी नाम !! (१९)

कोख से जो बालक जन्मेगा ! नाम परीक्षित उसका होगा !!
बनेगा राजा बड़ा महान ! पतित पावन दादी नाम !! (२०)

बजेगी जग में उसकी भेरी ! सुन ले बात आज तू मेरी !!
होगा तेरा अमर निशाँ ! पतित पावन दादी नाम !! (२१)

बात सुन उत्तरा चकराई ! बोली प्रभु से मनं सकुचाई !!
तेरी लीला तेरे नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (२२)

प्रभुजी फिर दयाकर बोले ! थोडा सा मुस्का कर बोले !!
सुनलो अब तुम अमर ज्ञान ! पतित पावन दादी नाम !! (२३)

निराकार ने दे आकर ! किया सृष्टि का है श्रींगार !!
स्वयं रहता है अंतर्ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (२४)

जो आया है वह जायेगा ! नहीं यहाँ पर रुक पायेगा !!
जड़ चेतन सब एक सामान ! पतित पावन दादी नाम !! (२५)

सत् की शक्ति तन मनं आई ! तब उसने यह व्यथा बताई !!
इच्छा होती बड़ी बलवान ! पतित पावन दादी नाम !! (२६)

जग को सत्य का भान कराऊँ ! सत् शक्ति पहचान बताऊँ !!
देवो अभिलाषा पर ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (२७)

सत्य ही है सत् का आधार ! बोले जग के करुनाधार !!
इस से ही सब का कल्याण ! पतित पावन दादी नाम !! (२८)

जो अभिलाषा रही अधूरी ! होगी वह कलयुग में पूरी !!
देता तुझे आज वरदान ! पतित पावन दादी नाम !! (२९)

अभिमन्यु, तंधन दास बनेगा ! वश्य के घर में वह जन्मेगा !!
होगा नारायणी तेरा नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (३०)

युद्ध वहां पर होगा भारी ! जब तू सत् दिखलाना नारी !!
कर शत्रु का काम तमाम ! पतित पावन दादी नाम !! (३१)

शक्ति रूप वहां दिखलाना ! जग के सारे कसता मिटाना !!
पूजेंगे सब सुबह शाम ! पतित पावन दादी नाम !! (३२)

संवत तेरह सौ अडतीस ! प्रगति शक्ति कलयुग बीच !!
पूरण करने सत् अभियान ! पतित पावन दादी नाम !! (३३)

कार्तिक शुक्ल अस्थामी बीती ! आई नवमी की शुभ तिथि !!
मंगलवार जन्मी गुना खान ! पतित पावन दादी नाम !! (३४)

महम डोकवा जिला हिसार ! अग्रवाल घर लिया अवतार !!
बतलाने सत् की पहचान ! पतित पावन दादी नाम !! (३५)

सेठ गुर्समल था बड़ा नामी ! जन्मी उसके घर नरनी !!
माता का सुलोचना नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (३६)

बचपन से ही गजब वोह धाये ! होनहार के रंग दिखलाए !!
जल्दी पढ़ लिए वेड पुराण ! पतित पावन दादी नाम !! (३७)

राधा रुक्मण कृष्ण मुरारी ! त्रिमूर्ति संग बात विचारी !!
आज चले लेने इम्तिहान ! पतित पावन दादी नाम !! (३८)

झट साधू का वेश बनाया ! द्वारे आकर अलख जगाया !!
बोले जय जय सियाराम ! पतित पावन दादी नाम !! (३९)

माता ने की है अगुवाई ! चरणों में गिर धोक लगाई !!
स्वीकारो मेरा परनाम ! पतित पावन दादी नाम !! ( ४०)

बड़े भाग्य जो आये साईं ! बोली सेठानी मुस्काई !!
देखो बेटी के दिनमान ! पतित पावन दादी नाम !! (४१)

बेटी बड़े भाग्य जन्मी है ! बस इसमें तोह एक कमी है !!
सूनी होगी जल्दी मांग ! पतित पावन दादी नाम !! (४२)

सुनकर माँ को मोर्चा आई ! बेटी ने जब नैन मिली !!
झट से गई उन्हें पहचान ! पतित पावन दादी नाम !! (४३)

करती हूँ प्रणाम मै सबको ! असली रूप दिखावो मुझको !!
विनती सुनलो दया निधान ! पतित पावन दादी नाम !! (४४)

सबने अपना रूप दिखाया ! नारायणी ने आशीष पाया !!
हो गए फिर वोह अंतर्धान ! पतित पावन दादी नाम !! (४५)

अभिमन्यु जो वीर कहाए ! कलयुग में तंधन बन आये !!
जन्मे गाँव हिसार है नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (४६)

बंसल गोत्र में जनम लिया है ! और शक्ति का वरन किया है !!
धन्य किया है कुल का नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (४७)

माता शारदा, बहिना श्यामा ! अनुज है उनके कमलारामा !!
पिता श्री है जाली राम ! पतित पावन दादी नाम !! (४८)

मात-पिता की सेवा करते ! विपदा से वे कभी न डरते !!
थे वे वीर धीर गुणवान ! पतित पावन दादी नाम !! (४९)

था नवाब हिसार का झाद्चंद ! आई है जब उसको अड़चन !!
सोचे किसे बनाऊ दीवान ! पतित पावन दादी नाम !! (५०)

मंत्री गन ने उससे सुझाया ! जालिरामजी का नाम बताया !!
देवो उनको यह सन्मान ! पतित पावन दादी नाम !! (५१)

जलिरामजी को झट बुलवाया ! प्रेम सहित आदेश सुनाया !!
आप संभालो पद्द दीवान ! पतित पावन दादी नाम !! (५२)

विवाह योग्य जब हुई है बाई ! मात-पिता मन चिंता छाई !!
करदे अब तोह कन्यादान ! पतित पावन दादी नाम !! (५३)

लागे धुंडने वर उस लायक ! गुनी वीर सुन्दर सुखदायक !!
मिला नहीं हो रहे हैरान ! पतित पावन दादी नाम !! (५४)

बाई ने जब ध्यान लगाया ! प्रभु ने उसका ह्रदय जगाया !!
हुआ बोध पति तंधन नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (५५)

मात-पिता को जब यह बताया ! तंधन जी का लगन भिजवाया !!
आये पूरण कर सब काम ! पतित पावन दादी नाम !! (५६)

संवत तेरह सौ इक्यावन ! विवाह घडी जब आई पावन !!
गूंजा शेहनाई पर गान ! पतित पावन दादी नाम !!(५७)

मंगसिर बदी नौमी मंगलवार ! बनी नाराणी तंधन नार !!
आशीर्वाद दिया भगवान् ! पतित पावन दादी नाम !! (५८)

मात-पिता ने सीख बताई ! और बेटी को दी है विदाई !!
रखना हमेशा कुल का मान ! पतित पावन दादी नाम !! (५९)

बाई जब ससुराल पधारी ! देख के बतलाये नर नारी !!
आई देवी घर दीवान ! पतित पावन दादी नाम !! (६०)

झाद्चंद का बेटा शेह्जादा ! तंधन के संग खेलने जाता !!
दो शरीर पर एक थे प्राण ! पतित पावन दादी नाम !! (६१)

घोड़ी सुन्दर थी आती प्यारी ! तंधन जिस पर करे सवारी !!
वही निमित्त हुई वरदान ! पतित पावन दादी नाम !! (६२)

शेह्जादे का मनं ललचाया ! तंधन जिस पर करे सवारी !!
छोड़ दे तू घोड़ी का ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (६३)

होनी ने जब रंग दिखलाया ! घोड़ी चुरून मनं भरमाया !!
गाया रात में वह नादान ! पतित पावन दादी नाम !! (६४)

जाग हुई जब भगा बेचारा ! तंधन ने तब भाला मारा !!
निकले शेह्जादे के प्राण ! पतित पावन दादी नाम !! (६५)

लाश देख सभी घबराए ! सीमा पार झुन्झ्नुं आये !!
रातों रात चले अविराम ! पतित पावन दादी नाम !! (६६)

दुःख हुआ झाद्चंद को भारी ! करें विलाप मात और नारी !!
सूनी हुई कोख और मांग ! पतित पावन दादी नाम !! (६७)

झाद्चंद कहे सुनो दरबारी ! कार्लो बदले की तेयारी !!
सभी रखो तंधन का ध्यान ! पतित पावन दादी नाम !! (६८)

गौने का जब दिन है आया ! तंधन को ससुराल पाठ्य !!
संग भेजा राणा बलवान ! पतित पावन दादी नाम !! (६९)

कर गौना जब हुई है विदाई ! अपशाक्गुनो की बाढ़ सी आई !!
चले बोलते जय जय राम ! पतित पावन दादी नाम !! (७०)

गुप्तचरों ने खबर सुनाई ! झाद्चंद ने फौजें भिजवाई !!
करो तंधन का काम तमाम ! पतित पावन दादी नाम !! (७१)

जंगल बीच हुई है लड़ाई ! तंधन ने वीरता दिखाई !!
मारे शत्रु के बहुत जवान ! पतित पावन दादी नाम !! (७२)

पीछे से वार किया दुश्मन ने ! वीरगति पाई तंधन ने !!
हुआ अमर उनका बलिदान ! पतित पावन दादी नाम !! (७३)

नारायणी ने जब यह देखा ! चढ़ा जोश तब उससे अनोखा !!
कुदी रण में भृकुटी तान ! पतित पावन दादी नाम !! (७४)

हाथों में तलवार है चमकी ! और साथ में चुदियाँ खनकी !!
बोली मिटाऊं तेरा नामो निशाँ ! पतित पावन दादी नाम !! (७५)

रणचंडी जब रूप दिखाया ! दुश्मन ने तब होश गंवाया !!
देख रूप विकराल महान ! पतित पावन दादी नाम !! (७६)

कर दुश्मन का साफ़ सफाया ! राणा को आदेश सुनाया !!
अब हम चलते अपने धाम ! पतित पावन दादी नाम !! (७७)

वह संवत तेरह सौ बावन ! जब यह धरती हुई है पावन !!
लहराया ध्वज सत् का आन ! पतित पावन दादी नाम !! (७८)

मंगसिर बदी नौमी मंगलवार ! सत् चदा है अपरम्पार !!
शक्ति का किया आवहान ! पतित पावन दादी नाम !! (७९)

मुख मंडल पर तेज है दमके ! जैसे नभ में बिजली चमके !!
छाई होटों पर मुस्कान ! पतित पावन दादी नाम !! (८०)

अग्नि सत् से स्वयं प्रकति ! शक्ति ने सत् की ज्योत दिखाई !!
चमके धरती और आसमान ! पतित पावन दादी नाम !! (८१)

पञ्च तत्त्व देह हुआ विलीन ! शक्ति हुई शक्ति में लीन !!
शेष भस्मी अवशेष सामान ! पतित पावन दादी नाम !! (८२)

दृश्य देख राणा चकराया ! झट दुर्गा का रूप दिखाया !!
कर रही वर्षा पुष्प विमान ! पतित पावन दादी नाम !! (८३)

बाएं कर त्रिशूल है चमके ! दायें में स्वस्तिक भी दमके !!
आभा मुख मंडल की महान ! पतित पावन दादी नाम !! (८४)

धन्य हुआ राणा का जीवन ! बोला विनती कर मनं ही मनं !!
जय भवानी जय दुर्गा नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (८५)

राणा ने प्रणाम किया है ! माँ ने आशीवाद दिया है !!
संग मेरे पुजेगा तेरा नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (८६)

भस्मी कलश ले झुंझुन आया ! घोडा रुका वहीँ पे लगाया !!
समाधी मंदिर है आलिशान ! पतित पावन दादी नाम !! (८७)

बरस सात सौ की यह दादी ! हो गई दादी की पढ़दादी !!
अमर रहेगा इसका नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (८८)

जनम-मरण और पारण दादी का ! वार मंगल और नौमी तिथि का !!
संगम और संयोग महान ! पतित पावन दादी नाम !! (८९)

नौ का अंक पूरण कहलाता ! मंगल भी मंगल का दाता !!
दादी पूरण शक्ति निधान ! पतित पावन दादी नाम !! (९०)

हुई नारायणी जग में विख्यात ! बनकर दादी रानिशक्ति मात !!
पूजे माँ को सारा जहां ! पतित पावन दादी नाम !! (९१)

माँ दुर्गा की है अवतार ! कोई ना पावे इसका पार !!
युग-युग में अवतारी नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (९२)

लक्ष्मी शारदा उमा काली ! वैष्णवी कलि में झुंझुनू वाली !!
सब पर्यायवाची इसके नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (९३)

शक्ति की जो बात है मूल ! वाही दादी निशाँ त्रिशूल !!
है इसका स्पष्ट प्रमाण ! पतित पावन दादी नाम !! (९४)

देख शक्ति का धाम निराला ! सब देवों ने देरा डाला !!
सुर संगम है दादी धाम ! पतित पावन दादी नाम !! (९५)

पित्तर देव सब यहाँ बिराजे ! बैठे शिव दरबार लगाके !!
हनुमत कंधे लक्ष्मण राम ! पतित पावन दादी नाम !! (९६)

शोषण शक्ति नव दुर्गाये ! त्रिमूर्ति नवग्रह मुस्काए !!
सब दिगपाल संभाले काम ! पतित पावन दादी नाम !! (९७)

कुल-देवी दादी महारानी ! नहीं है इसका कोई सानी !!
करती कली में माँ कल्याण ! पतित पावन दादी नाम !! (९८)

दादी की जग में है ख्याति ! संग में बहिनों को पुज्वाती !!
तंधन पित्तर शक्तिमान ! पतित पावन दादी नाम !! (९९)

जो भी मनं से पूजे इसको ! दादी दर्शन देती उसको !!
जात पात का नहीं है काम ! पतित पावन दादी नाम !! (१००)

रोली मोली महेंदी चावल ! धुप पुष्प दीपक और श्रीफल !!
पूजा का इनसे ही विधान ! पतित पावन दादी नाम !! (१०१)

चूड़ा चुनड भेंट चादावे ! बहिन बेटी के काम वो आवें !!
रखती दादी सबका मान ! पतित पावन दादी नाम !! (१०२)

माँ, दादी सब शक्ति के रूप ! नारी स्वयं भी शक्ति स्वरुप !!
शक्ति पूजा नारी सम्मान ! पतित पावन दादी नाम !! (१०३)

जितनी भी शक्तियां है कलि में ! राणीशक्ति सिर मोर सभी में !!
इस शक्ति को करो प्रणाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१०४)

महिमा दादी की आती भारी ! मंगल भवन अमंगल हारी !!
गुण गावे सब वेद पुराण ! पतित पावन दादी नाम !! (१०५)

यहाँ मंगल मनका पुष्पोहार ! करदे तुझको भाव से पार !!
कर अर्पण दादी के नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१०६)

पाठ करें जो मंगल मनका ! कष्ट हरे माँ उसके तनका !!
पुरें हो उसके अरमान ! पतित पावन दादी नाम !! (१०७)

श्री कृष्ण ने लीला गई ! दयाकर सुनले मेरी माई !!
भूलूँ नहीं मै तेरा नाम ! पतित पावन दादी नाम !! (१०८)

मंगल माला पूरी हुई , मनका एक सौ आठ !!
मनोकामना पूर्ण हो , नित्य करे जो पाठ !!

|| जय दादी की || || जय दादी की ||
|| जय दादी की || || जय दादी की ||
|| जय दादी की || || जय दादी की ||
|| जय दादी की || || जय दादी की ||

|| मंगल भवन अमंगल हारी , दादीजी थारो नाम बड़ो सुखारी ||
|| प्रेम से बोलो जय दादी की ||

Rani Sati Dadi

Sri Dadiji Mangal Manka 108

Jaya Ambe Jaya Durge Maat l Jaya Narani Jaya Tandhan Daas ll
Jaya Dadi Jaya Shakti Naam l Patit Paavan Dadi Naam ll

ll Manka ll

Deen heen ka dukh harne ko l Jana gana me mangal karne ko ll
Shakti prakati Jhunjhnun Dhaam l Patit paavan Dadi Naam ll 1 ll

Yaha Shakti hai Maa Jagdamba l Yahi Bhavani Durge Amba ll
Narayani hai iska naam l Patit paavan Dadi Naam ll 2 ll

Peedhi dar peedhi ka rishta l Tabhi Dadi naam hai iska ll
Kuldevi ko karo pranaam l Patit paavan Dadi Naam ll 3 ll

Hai amogh Dadi ki Shakti l Sadiyon se karte sab bhakti ll
Pujte hain Trishul nishaan l Patit paavan Dadi Naam ll 4 ll

Maa Shakti ka Alakh jagaun l Dadi Maa ki baat bataun ll
Hai swayam Shakti Durga mahan l Patit paavan Dadi Naam ll 5 ll

Jaanat hai sabhi nar naari l Yudh hua Mahabharat bhaari ll
Tha woh dharm karm sangraam l Patit paavan Dadi Naam ll 6 ll

Kaurav, Paandav hui ladaai l Leela Prabhu ne ajab dikhai ll
Bane saarthi swayam Bhagwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 7 ll

Geeta me updesh dia hai l Jag ko yeh sandesh dia hai ll
Karm karo taj fal ka dhyan l Patit paavan Dadi Naam ll 8 ll

Jab jab dharti par dharm lutega l Aur paap ka karm badhega ll
Avtarenge Sri Bhagwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 9 ll

Abhimanyu Arjun ka laal l Mandraya Jab uska kaal ll
Kuda ran me wah balwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 10 ll

Chakravyuh ki ladi ladai l Veer gati Abhimanyu pai ll
Gaya Veer Wah toh Surdhaam l Patit paavan Dadi Naam ll 11 ll

Uttara, Abhimanyu ki Naari l Pati Dharm ka Sat tha bhaari ll
Uss Devi ko karo pranaam ll Patit paavan Dadi Naam ll 12 ll

Dekh Pati parlok sidhare l Uttara ne yon vachan uchare ll
Jeevan hua aaj nishpraan l Patit paavan Dadi Naam ll 13 ll

Jaun me bhi sang Pati ke l Khuub chadha yeh rang mati pe ll
Satt se me bhi karun prayaan l Patit paavan Dadi Naam ll 14 ll

Dekh Naari ka hatt atee bhaari l Bole Prabhi se sab nar naari ll
Karo samasya ka samadhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 15 ll

Prabhi ne sabko yon samjhaya l Choddo sabhi moh aur maaya ll
Hoga wahi jo vidhi vidhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 16 ll

Bole fir se Uttara se jaai l Aisi ghadi abhi nahi aai ll
Kar Tu dharm karm ka dhyan l Patit paavan Dadi Naam ll 17 ll

Tu hai garbhvati ek naari l Fir kaise yeh baat vichari ll
Soch le kya hoga anjaam l Patit paavan Dadi Naam ll 18 ll

Ab taje jeevan paap lagega l Kokh se Tere nishaan mitega ll
Nahi hai isme teri shaan l Patit paavan Dadi Naam ll 19 ll

Kokh se jo baalak janmega l Naam Parikshit uska hoga ll
Banega Raaja bada mahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 20 ll

Bajegi Jag me uski bheri l Sun le baat aaj Tu Meri ll
Hoga Tera amar nishaan l Patit paavan Dadi Naam ll 21 ll

Baat suni Uttara chakrai l Boli Prabhu se mann sakuchai ll
Teri leela Tere naam l Patit paavan Dadi Naam ll 22 ll

Prabhuji fir dayakar bole l Thoda sa muskaa kar bole ll
Sunlo ab Tum amar gyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 23 ll

Niraakaar ne de aakar l Kiya srishti ka hai sringaar ll
Swayam rehta hai antardhyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 24 ll

Jo aaya hai wah jayega l Nahin yahan par ruk paayega ll
Jad chetan sab ek samaan l Patit paavan Dadi Naam ll 25 ll

Satt ki shakti tan mann aai l Tab usne yeh vyatha batai ll
Ichchha hoti badi balwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 26 ll

Jag ko satya ka bhaan karaun l Satt Shakti pehchaan bataun ll
Devo abhilaasha par dhyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 27 ll

Satya hi hai satt ka adhaar l Bole jag ke Karnadhaar ll
Iss se hi sab ka kalyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 28 ll

Jo abhilaasha rahi adhuri l Hogi wah kalyug me puri ll
Deta Tujhe aaj vardaan l Patit paavan Dadi Naam ll 29 ll

Abhimanyu, Tandhan daas banega l Vashya ke ghar me wah janmega ll
Hoga Narayani Tera naam l Patit paavan Dadi Naam ll 30 ll

Yuddh wahan par hoga bhaari l Jab Tu satt dikhlana naari ll
Kar shatru ka kaam tamam l Patit paavan Dadi Naam ll 31 ll

Shakti roop wahan dikhlana l
Jag ke saare kasta mitana ll
Pujenge sab subah shaam l
Patit paavan Dadi Naam ll 32 ll

Samvat terah sau adtees l Pragati Shakti kalyug beech ll
Puran karne Satt abhiyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 33 ll

Kartik shukla asthami beeti l Aai navmi ki shubh teethi ll
Mangalvaar janmi guna khaan l Patit paavan Dadi Naam ll 34 ll

Maham Dokva jeela hisaar l Agrawal ghar lia avtaar ll
Batlaane Satt ki pehchaan l Patit paavan Dadi Naam ll 35 ll

Seth Gursamal tha bada naami l Janmi uske ghar Narani ll
Maata ka Sulochana naam l Patit paavan Dadi Naam ll 36 ll

Bachpan se hi gajab woh dhaaye l Honhaar ke rang dikhlaaye ll
Jaldi padh liye ved puraan l Patit paavan Dadi Naam ll 37 ll

Radha Rukman Krsna Murari l Trimurti sang baat vichari ll
Aaj chale lene imtihaan l Patit paavan Dadi Naam ll 38 ll

Jhatt sadhu ka vesh banaya l Dware aakar alakh jagaya ll
Bole Jai Jai Siyaram l Patit paavan Dadi Naam ll 39 ll

Maata ne ki hai aguvaai l Charnon me gir dhok lagai ll
Sweekaro Mera parnaam l Patit paavan Dadi Naam ll 40 ll

Badde bhagya jo aaye Sayeen l Boli Sethani muskaai ll
Dekho beti ke dinmaan l Patit paavan Dadi Naam ll 41 ll

Beti badde bhagya janmi hai l Bas isme toh ek kamee hai ll
Sooni hogi jaldi maang l Patit paavan Dadi Naam ll 42 ll

Sunkar Maa ko murcha aai l Beti ne jab nain milai ll
Jhatt se gai unhe pehchaan l Patit paavan Dadi Naam ll 43 ll

Karti hun pranaam Me sabko l Asli roop dikhavo mujhko ll
Vinti sunlo daya nidhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 44 ll

Sabne apna roop dikhaya l Narayani ne aashish paaya ll
Ho gaye fir Woh antardhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 45 ll

Abhimanyu jo veer kahaye l Kalyug me Tandhan ban aaye ll
Janme gaanv Hisaar hai naam l Patit paavan Dadi Naam ll 46 ll

Bansal gotra me janam lia hai l Aur shakti ka varan kia hai ll
Dhanya kia hai kul ka naam l Patit paavan Dadi Naam ll 47 ll

Maata Sharda, Bahina Shyaama l Anuj hai unke Kamlaraama ll
Pita Sri hai Jaalirama l Patit paavan Dadi Naam ll 48 ll

Maat-Pitah ki seva karte l Vipda se Wah kabhi na darte ll
The Ve Veer dheer gunvaan l Patit paavan Dadi Naam ll 49 ll

Tha nawab Hisaar ka Jhadchand l Aai hai jab usko adchan ll
Soche kisse banau deewan l Patit paavan Dadi Naam ll 50 ll

Mantri gan ne usse sujhaya l Jaaliramji ka naam bataya ll
Devo unko yah sanman l Patit paavan Dadi Naam ll 51 ll

Jalraamji ko jhatt bulvaya l Prem sahit aadesh sunaya ll
Aap sambhalo padd deewan l Patit paavan Dadi Naam ll 52 ll

Vivaah yogya jab hui hai Baai l Maat-Pitah man chinta chaai ll
Karde ab toh kanyadan l Patit paavan Dadi Naam ll 53 ll

Lagge dhundhne var uss layak l Guni veer sundar sukhdayak ll
Mila nahin ho rahe hairaan l Patit paavan Dadi Naam ll 54 ll

Bai ne jab dhyan lagaya l Prabhu ne uska hriday jagaya ll
Hua bodh Pati Tandhan naam l Patit paavan Dadi Naam ll 55 ll

Maat-Pitah ko jab yah bataya l Tandhan ji ka lagan bhijvaya ll
Aaye puran kar sab kaam l Patit paavan Dadi Naam ll 56 ll

Samvat terah sau ikyavan l Vivah ghadi jab aai paavan ll
Gunja shehnai par gaan l Patit paavan Dadi Naam ll 57 ll

Mangsir badi Naumi Mangalvaar l Bani Narani Tandhan Naar ll
Ashirwaad dia Bhagwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 58 ll

Maat-Pitah ne seekh batai l Aur beti ko di hai vidaai ll
Rakhna hamesha kul ka maan l Patit paavan Dadi Naam ll 59 ll

Bai jab sasuraal padhari l Dekh ke batlaye nar naari ll
Aai Devi ghar Deewan l Patit paavan Dadi Naam ll 60 ll

Jhadchand ka beta shehzaada l Tandhan ke sang khelne jaata ll
Do shareer par ek the praan l Patit paavan Dadi Naam ll 61 ll

Ghodi sundar thi atee pyaari l Tandhan jis par kare sawari ll
Wahi nimitt hui vardaan l Patit paavan Dadi Naam ll 62 ll

Shehzaade ka mann lalchaaya l Tandhan ne usko samjhaya ll
Chodd de tu ghodi ka dhyan l Patit paavan Dadi Naam ll 63 ll

Honee ne jab rang dikhlaya l Ghodi churaun mann bharmaaya ll
Gaya raat me wah naadan l Patit paavan Dadi Naam ll 64 ll

Jaag hui jab bhaga becharaa l Tandhan ne tab bhaala maara ll
Nikle shehzaade ke praan l Patit paavan Dadi Naam ll 65 ll

Laash dekh sabhi ghabraaye l Seema paar Jhunjhnun aaye ll
Raaton raat chale aviraam l Patit paavan Dadi Naam ll 66 ll

Dukh hua Jhadchand ko bhaari l Karen vilaap Maat aur Naari ll
Sooni hui kokh aur maang l Patit paavan Dadi Naam ll 67 ll

Jhadchand kahe suno darbaari l Karlo badle ki tayyari ll
Sabhi rakho Tandhan ka dhyan l Patit paavan Dadi Naam ll 68 ll

Gaune ka jab din hai aaya l Tandhan ko sasuraal pathaya ll
Sang bheja Raana balwaan l Patit paavan Dadi Naam ll 69 ll

Kar gauna jab hui hai vidaai l Apshakuno ki baadh si aai ll
Chale bolte Jai Jai Raam l Patit paavan Dadi Naam ll 70 ll

Guptcharon ne khabar sunai l Jhadchand ne faujen bhijvai ll
Karo Tandhan ka kaam tamam l Patit paavan Dadi Naam ll 71 ll

Jangal beech hui hai ladaai l Tandhan ne Veerta dikhai ll
Maare shatru ke bahut jawaan l Patit paavan Dadi Naam ll 72 ll

Peeche se vaar kia dushman ne l Veergati paai Tandhan ne ll
Hua amar Unka balidaan l Patit paavan Dadi Naam ll 73 ll

Narayani ne jab yah dekha l Chadha josh tab usse anokha ll
Kudi rann me bhrikuti taan l Patit paavan Dadi Naam ll 74 ll

Hathon me talwaar hai chamki l Aur saath me chudiyan khanki ll
Boli mitaun tera naamo nishaan l Patit paavan Dadi Naam ll 75 ll

Ranchandi jab roop dikhaya l Dushman ne tab hosh ganvaya ll
Dekh roop vikraal mahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 76 ll

Kar dushman ka saaf safaya l Rana ko aadesh sunaya ll
Ab hum chalte apne dhaam l Patit paavan Dadi Naam ll 77 ll

Vah samvat terah sau baavan l Jab yah dharti hui hai paavan ll
Lahraaya dhvaj satt ka aan l Patit paavan Dadi Naam ll 78 ll

Mangsir badi Naumi Mangalvaar l Satt chada hai aprampaar ll
Shakti ka kia aavahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 79 ll

Mukh mandal par tej hai damke l Jaise nabh me bijli chamke ll
Chaai hoton par muskaan l Patit paavan Dadi Naam ll 80 ll

Agni Satt se swayam praktai l Shakti ne satt ki jyot dikhai ll
Chamke Dharti aur aasman l Patit paavan Dadi Naam ll 81 ll

Panch tatva deh hua veelen l Shakti hui Shakti me leen ll
Shesh bhasmi avshesh samaan l Patit paavan Dadi Naam ll 82 ll

Drishya dekh Raana chakraaya l Jhatt Durga ka roop dikhaya ll
Kar rahe varsha pusp vimaan l Patit paavan Dadi Naam ll 83 ll

Baayen kar trishul hai chamke l Daayen me swastik bhi damke ll
Aabha mukh mandal ki mahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 84 ll

Dhanya hua Raana ka jeevan l Bola vintee ka mann hi mann ll
Jaya Bhavani Jaya Durga naam l Patit paavan Dadi Naam ll 85 ll

Raana ne pranaam kia hai l Maa ne aashiwaad dia hai ll
Sang Mere pujega Tera naam l Patit paavan Dadi Naam ll 86 ll

Bhasmi kalash le Jhunjhnun aaya l Ghoda ruka wahin pe lagaya ll
Samadhi Mandir hai aalishaan l Patit paavan Dadi Naam ll 87 ll

Baras saat sau ki Yah Daadi l Ho gai Dadi ki Pad-dadi ll
Amar rahega Iska naam l Patit paavan Dadi Naam ll 88 ll

Janam-maran aur paran Dadi ka l Vaar Mangal aur naumi teethi ka ll
Sangam aur sanyog mahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 89 ll

Nau ka ank puran kehlaata l Mangal bhi mangl ka daata ll
Dadi puran Shakti nidhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 90 ll

Hui Narayani jag me vikhyat l Bankar Dadi Ranishakti Maat ll
Puje Maa ko saara jahaan l Patit paavan Dadi Naam ll 91 ll

Maa Durga ki hai avtaar l Koi na paave iska paar ll
Yug-yug me avtaari naam l Patit paavan Dadi Naam ll 92 ll

Lakshmi Sharda Uma Kaali l Vaishnavi Kali me Jhunhnun wali ll
Sab paryayvachi iske naam l Patit paavan Dadi Naam ll 93 ll

Shakti ki jo baat hai mool l Vahi Dadi nishaan Trishul ll
Hai iska spashta pramaan l Patit paavan Dadi Naam ll 94 ll

Dekh Shakti ka dhaam niraala lSab Devon ne dera daala ll
Sur sangam hai Dadi dhaam l Patit paavan Dadi Naam ll 95 ll

Pittar Dev sab yahan biraje l Baithe Shiv darbaar lagake ll
Hanumat Kandhe Lakshman Raam l Patit paavan Dadi Naam ll 96 ll

Sodhash Shakti Nav Durgaye l Trimurti Navgrah muskaye ll
Sab Digpaal sambhale kaam l Patit paavan Dadi Naam ll 97 ll

Kul-devi Dadi Maharani l Nahin hai ika koi saani ll
Karti kali me Maa Kalyaan l Patit paavan Dadi Naam ll 98 ll

Dadi ki jag me hai khyati l Sang me bahino ko pujvati ll
Tandhan Pittar Shaktimaan l Patit paavan Dadi Naam ll 99 ll

Jo bhi mann se puje Isko l Dadi darshan deti usko ll
Jaat paant ka nahin hai kaam l Patit paavan Dadi Naam ll 100 ll

Roli mauli mhendi chaaval l Dhoop Pushp Deepak aur Sriphal ll
Puja ka inse hi vidhaan l Patit paavan Dadi Naam ll 101 ll

Chooda chunnad bhenth chadave l Bahin beti ke kaam wo aaven ll
Rakhti Dadi sabka maan l Patit paavan Dadi Naam ll 102 ll

Maa, Dadi sab Shakti ke roop l Nari Swayam bhi Shakti swaroop ll
Shakti Puja Naari Samman l Patit paavan Dadi Naam ll 103 ll

Jitni bhi Shaktiyan hai Kali me l Ranishakti sir mor sabhi me ll
Iss Shakti ko karo pranaam l Patit paavan Dadi Naam ll 104 ll

Mahima Dadi ki atee bharee l Mangal bhavan amangal haaree ll
Gun gaave sab Ved Puran l Patit paavan Dadi Naam ll 105 ll

Yaha Mangal Manka Pushpohaar l Karde Tujhko bhav se paar ll
Kar arpan Dadi ke naam l Patit paavan Dadi Naam ll 106 ll

Paath karen jo Mangal Manka l Kashta hare Maa uske tanka ll
Puren ho uske armaan ll Patit paavan Dadi Naam ll 107 ll

“Sri Krsna” ne leela gaai l “Dayakar” sunle meri Maai ll
Bhuloon nahi me Tera naam l Patit paavan Dadi Naam ll 108 ll

Mangal Maala Poori hui l Manka Ek Sau Aath ll
Manokaamna purna ho l Nitya kare jo paath ll

Shri Rani Sati Aarti : श्री राणी सती जी की आरती

Shri Rani Sati Chalisa : श्री राणी सती जी की चालीसा

श्री रानी सती दादी मंत्र | Shri Rani Sati Dadi Mantra

What is Essay Writing Skills?

essay writing skill

Essay writing skills is a skill-set that assists in creating a valuable piece of a written work. This skill-set consists of such skills as brainstorming new ideas, finding and researching information, structuring the essay, writing effective introduction, and conclusion paragraphs. Let’s pay attention to the main elements of this skill-set and how to develop them.

1. Understanding the task

The very first step in writing a good academic essay is making sure that you understand the task in the correct way. Carefully read the instruction and till everything is clear. If there are some vague moments, take your time to check everything up with your professor. If writing essays is your hobby, pay some attention to whether the concept of your future essay is interesting and worth other people’s attention.

2. Brainstorming new ideas

The second step on your way to writing an awe-thrilling essay is to be able to brainstorm new ideas. It is not so difficult to do:

– focus on quantity and avoid criticism

In the matter of brainstorming, the main task is to generate more and more ideas even if they seem to be unreal or even crazy;

– combine and improve ideas

once you have generated a list of different ideas, make sure to consider changing them by improving, combining, and transforming.

3. Do some research for your essay

Once you have generated enough ideas, focus on finding more information on some particular aspects that require further research. To get only credible and trustworthy information, use such educational platforms and online library databases like Google Scholar, Airtable.com, JSTOR Home, PubMed, Science Directory, etc. Pay attention to the creation of in-text citation, reference list, or bibliography. If you do not do it or take information from the original source without changing it, you may be accused of plagiarism.

Check the requirements and guidelines of the following formats:

1. The American Psychological Association (APA) – use the surname of the author, the year– (Brown, 2009).

2. Modern Language Association (MLA) – use the surname of the author and the page number (Brown, p. 23).

3. Chicago Manual Style (CMS) – the in-text citation is presented in the form of notes: John Brown, New York Times (New York: Penguin Press, 2016).

The most common pitfall of citing is that information that is not cited or adequately cited can come across as plagiarism. Therefore, if you have taken some information from external sources, make sure to indicate where the evidence comes from. Another downfall is falling short of the mark to adequately reference the author’s text. If you do not want to spend your precious time on learning all these academic style particularities, you may hire professional paper writers for your further academic success.

Essay Writing

4. Organizing your thoughts

When you have already planned the essay, took time to understand the essay question, gathered the required information, check the guidelines on the required academic styles, it is high time to organize your thoughts for further development of your ideas.

– Make everything fit into the existing framework of introduction, body paragraphs, and conclusion.

– in your introduction, it is required to start an essay with a persuasive thesis statement that you can later support with adequate and fact-driven arguments. Start an essay with an interesting fact or quote. In Aristotle’s rhetorical approach, this is called logos or the argument from reason.

– in your body paragraph, pay attention to the way you are presenting information to the reader mention importing findings, add your analysis and creative ideas.

– in the conclusion, sum all the information you mentioned in the body paragraph and make sure that it correlates with the thesis statement mentioned in the introduction.

5. Important sources that may come in handy in your work

1. Grammarly is a source that helps you to check your writing according to the basic grammar and nonfunctional rules, stylistic, plagiarism, etc.

2. Owler is a website that gives instruction about writing accordingly to the existing formats.

3. Citethisforme – is a platform that is incredibly useful for generating the reference list and creating in-text citations.

4. Evernote – is a platform that gives you an opportunity to gather all the important ideas and collect them in the smartest way to later use in new essays.

5. Storybird – is a tool that gives you the ability to get readers’ feedback on your essays and enroll in some online writing courses.

As we can see, writing an essay is not so difficult when you have an understanding of what is expected and what should be done to make the process start. Remember that writing a good essay means the presence of such essential elements as the ability to generate ideas and concepts and present strong arguments, research skills, and critical thinking.

Shri Rani Sati Dadi Temple

Rani Sati Temple

Shri Rani Sati mandir is a well-known temple situated in Jhunjhunu district in the Rajasthan. Rani Sati Temple is a well – Known Temple situated in Jhunjhunu, Rajasthan. This temple has a history and hence is an indication to feminine bravery and spirit which certainly captures the attention of all devotees as she became Sati (Self-Immolation) on her Husband’s Death. This temple has a history of more than 400 years and is a indication to feminine bravery and spirit which certainly captures the attention of all Bhagaks. It is also famous for its magnificence, and extraordinary paintings. It is also part of one of the oldest presented Indian pilgrimages. A special Pujan utsav is held on the occasion of Bhado Amavasya (no moon day) in Shri Rani Sati temple jhunjhunu . This day the temple is full with devotees. People from all over the country visit this place to offer their puja to Goddess Sati Devi (Dadi Maa).

Rani Sati Dadi Temple

Rani Sati is also called Narayani Devi and referred to as Dadiji (grandmother). In the complex of Rani Sati temple there is also the Hanuman Temple, Sita Temple, Ganesha Temple and Lord Shiva Temple. This famous temple does not hold any paintings or statues, idols and deities of either female or male gods. However a trident depicting power and force is worshipped inside the temple complex by the followers and the devotees. However a beautiful portrait of Rani Sati in the pradhan mand is sited in the centre. This famed temple is prepared with white marbles and has colorful wall paintings.

History Of Rani Sati Dati

The history of Rani Sati starts from the time of Mahabharata. It is believed that Rani Sati was Uttara, wife of Abhimanyu (son of Arjun). When Abhimanyu was killed in the battlefield, Uttara decided to be sati along with Abhimanyu’s funeral. However amidst all this Lord Krishna came to her rescue and pursued her against her decision. He also granted her wish of being married to Abhimanyu and her desire to be sati in her next life.

Rani Sati Dadi Photo

As granted by Lord Krishna, in her next life she was born as the daughter of Gursamal in the village of Dokwa in Rajasthan. She was named – Narayani. Abhimanyu took birth in Hissar as son of Jaliram and named – Tandhan. Tandan and Narayani got married and were leading a peaceful life. He was in possession of a beautiful horse which was being eyed by the son of king of Hissar from quite some time. Tandan refused to hand over his precious horse to the king’s son. The king’s son then decides to forcefully acquire the horse and thus challenges Tandan for a combat. However Tandan fights the battle bravely and kills the King’s son instead. The enraged king thus kills Tandan in front of Narayani in the battle. Narayani symbolic to female bravery and power fights with the king and kills him. She then commanded Ranaji (the caretaker of the horse) to make immediate arrangements for her to be set ablaze along with her husband’s cremation. Ranaji playing a vital role in fulfilling her wish to be sati with her husband is then blessed by Narayani that his name will be taken and worshiped along with her name and since then she is known as Rani Sati. Very pleased with Ranaji who played a vital role in fulfilling her wish to be sati with her husband, she blessed him that his name will be taken and worshiped before her name and since then she is known as Rani Sati. Soon after, her influence of ‘sat’ (truth and loyalty) involuntarily set up the pyre ablaze. A storm rose from the ashes telling Ranaji to take them on the horse and to build a temple wherever the horse stops. The horse stopped in Jhunjhunu where the temple stands today.

श्री रानी सती मंदिर

राजस्थान के झुंझुनू में स्थित है रानी सती का मंदिर। शहर के बीचों-बीच स्थित मंदिर झुंझुनू शहर का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। बाहर से देखने में ये मंदिर किसी राजमहल सा दिखाई देता है। पूरा मंदिर संगमरमर से निर्मित है। इसकी बाहरी दीवारों पर शानदार रंगीन चित्रकारी की गई है। मंदिर में शनिवार और रविवार को खास तौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

Rani Sati Mandir

रानी सती जी को समर्पित झुंझुनू का ये मंदिर 400 साल पुराना है। यह मंदिर सम्मान, ममता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है। देश भर से भक्त रानी सती मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। भक्त यहां विशेष प्रार्थना करने के साथ ही भाद्रपद माह की अमावस्या पर आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में भी हिस्सा लेते हैं। रानी सती मंदिर के परिसर में कई और मंदिर हैं, जो शिवजी, गणेशजी, माता सीता और रामजी के परम भक्त हनुमान को समर्पित हैं। मंदिर परिसर में षोडश माता का सुंदर मंदिर है, जिसमें 16 देवियों की मूर्तियां लगी हैं। परिसर में सुंदर लक्ष्मीनारायण मंदिर भी बना है।

श्री राणी सती दादी का इतिहास

श्री राणी सती दादी को माँ दुर्गा का रूप माना गया है। परम आराध्य श्री दादी जी के प्रताप उनके वैभव व अपने भक्तों पर निःस्वार्थ कृपा बरसाने वाली “माँ नारायाणी” को कौन नही जानता | भारत में ही नही विदेशों में भी इनके भक्त और उपासक हैं | पौराणिक इतिहास से ग्यात होता है की महाभारत के युद्ध में चक्रव्यूह में वीर अभीमन्यु वीर गति को प्राप्त हुए थे | उस समय उत्तरा जी को भगवान श्री कृष्णा जी ने वरदान दिया था की कलयुग में तू “नारायाणी” के नाम से श्री सती दादी के रूप में विख्यात होगी और जन जन का कल्याण करेगी,सारे दुनिया में तू पूजीत होगी | उसी वरदान के स्वरूवप श्री सती दादी जी आज से लगभग 715 वर्ष पूर्वा मंगलवार मंगसिर वदि नवमीं सन्न 1352ईस्वीं 06.12.1295 को सती हुई थी |
जन्म – श्री दादी सती का जन्म संवत 1338 वि. कार्तिक शुक्ला नवमीं दिन मंगलवार रात 12 बजे के पश्चात डोकवा गाँव में हुआ था | इनके पिता का नाम सेठ श्री गुरसामल जी था |

बचपन – इनका नाम नारायाणी बाई रखा गया था | ये बचपन में धार्मिक व सतियो वाले खेल खेलती थी | बड़े होने पर सेठ जी ने उन्हे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ शस्त्र शिक्षा व घुड़सवारी की शिक्षा भी दिलाई थी | बचपन से ही इनमे दैविक शक्तियाँ नज़र आती थी, जिससे गाँव के लोग आश्चर्य चकितथे|

विवाह – नारायाणी बाई का विवाह हिस्सर राज्य के सेठ श्री ज़ालीराम जी के पुत्रा तनधन दास जी के साथ मंगसिर शुक्ला नवमीं सन्न 1351मंगलवार को बहुत ही धूम धाम से हुआ था |
तनधन जी का इतिहास – इनका जन्म हिस्सार के सेठ ज़ालीराम जी के घर पर हुआ था | इनकी माता का नाम शारदा देवी था | छोटे भाई का नाम कमलाराम व बहिन का नाम स्याना था | ज़ालीराम जी हिस्सार में दीवान थे | वहाँ के नॉवब के पुत्र और तनधन दास जी में मित्रता थी परंतु समय व संस्कार की बात है, तनधन दास जी की घोड़ी शहज़ादे को भा गयी | घोड़ी पाने की ज़िद से दोनो में दुश्मनी ठन गयी | घोड़ी छीनने के प्रयत्न में शहज़ादा मारा गया | इसी हादसे से घबरा कर दीवान जी रातो रत परिवार सहित हिस्सर से झुनझुनु की ओर चल दिए | हिस्सर सेना की ताक़त झुनझुनु सेना से टक्कर लेने की नही थी | दोनो शाहो में शत्रुता होने के कारण ये लोग झुनझुनु में बस गये |

मुकलावा – मुकलावे के लिए ब्राह्मण के द्वारा दीवान साहब के पास निमंत्रण भेजा गया | निमंत्रण स्वीकार होने पर तनधन दास जी राणा के साथ कुछ सैनिको सहित मुकलावे के लिए “महम” पहुँचे | मंगसिर कृष्णा नवमीं सन्न 1352 मंगलवार प्रातः शुभ बेला में नारायाणी बाई विदा हुई |
परंतु होने को कुछ और ही मंजूर था | इधर नवाब घात लगाकर बैठा था | मुकलावे की बात सुनकर सारी पहाड़ी को घेर लिया | “देवसर” की पहाड़ी के पास पहुँचते ही सैनिको ने हमला कर दिया | तनधन दास जी ने वीरता से डटकर हिस्सारी फ़ौजो का सामना किया | विधाता का लेख देखिए पीछे से एक सैनिक ने धोके से वार कर दिया, तनधन जी वीरगति को प्राप्त हुए |

नई नवेली दुल्हन ने डोली से जब यह सब देखा तो वह वीरांगना नारायाणी चंडी का रूप धारण कर सारे दुश्मनो का सफ़ाया कर दिया | झडचन का भी एक ही वार में ख़ात्मा कर दिया | लाशो से ज़मीन को पाट दिया | सारी भूमि रक्त रंजीत हो गयी | बची हुई फौज भाग खड़ी हुई | इसे देख राणा जी की तंद्रा जगी, वे आकर माँ नाराराणी से प्रार्थना करने लगे, तब माता ने शांत होकर शस्त्रों का त्याग किया | फिर राणा जी को बुला कर उनसे कहा –मैं सती होउंगी तुम जल्दी से चीता तय्यार करने के लिए लकड़ी लाओ | चीता बनने में देर हुई और सूर्या छिपने लगा तो उन्होने सत् के बल से सूर्या को ढलने से रोक दिया | अपने पति का शव लेकर चीता पर बैठ गई | चुड़े से अग्नि प्रकट हुई और सती पति लोक चली गयी | चीता धू धू जलने लगी| देवताओं ने गगन से सुमन वृष्टि की |
वरदान – तत्पश्चात चीता में से देवी रूप में सती प्रकट हुई और मधुर वाणी में राणा जी से बोली, मेरी चीता की भस्म को घोड़ी पर रख कर ले जाना,जहाँ ये घोड़ी रुक जाएगी वही मेरा स्थान होगा | मैं उसी जगह से जन-जन का कल्याण करूँगी | ऐसा सुन कर राणा बहुत रुदन करने लगा | तब माँ ने उन्हे आशीर्वाद दिया की मेरे नाम से पहले तुम्हारा नाम आएगा “रानी सती” नाम इसी कारण से प्रसीध हुआ | घोड़ी झुनझुनु गाँव में आकर रुक गयी | भस्म को भी वहीं पघराकर राणा ने घर में जाकर सारा वृतांत सुनाया | ये सब सुनकर माता पिता भाई बहिन सभी शोकाकुल हो गये |आज्ञनुसार भस्म की जगह पर एक सुंदर मंदिर का निर्माण कराया | आज वही मंदिर एक बहुत बड़ा पुण्य स्थल है, जहाँ बैठी माँ “रानी सती दादी जी”अपने बच्चो पर अपनी असीम अनुकंपा बरसा रही है | अपनी दया दृष्टि से सभी को हर्षा रही है |

“जगदंबा जग तारिणी, रानी सती मेरी मात |
भूल चूक सब माफ़ कर, रखियो सिर पर हाथ ||”

“जै दादी माँ “

Shri Rani Sati Aarti : श्री राणी सती जी की आरती

Shri Rani Sati Chalisa : श्री राणी सती जी की चालीसा

श्री रानी सती दादी मंत्र | Shri Rani Sati Dadi Mantra

श्री रानी सती दादी मंत्र | Shri Rani Sati Dadi Mantra

rani sati

Rani Sati Dadi Mantra is a powerfull mantra which worship our God or Goddess in a Specific way.

श्री रानी सती दादी महा मंत्र

श्री रानी सती नमः
या देवी सर्व भूतेशु सती रुपेणी संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नारायणी नामोस्तुते ॥

श्री रानी सती दादी बीज मंत्र
ॐ आयें क्लीम श्रीं रानी सती नमः

श्री रानी सती दादी जाप मंत्र
ॐ भगवती श्री रानी सती नमः

Shri Rani Sati Dadi Maha Mantra

Shri Rani Satye Namah

Ya Devi Sarva Bhuteshu, Sati Rupen Sanshita
Namastsaye Namastsaye, Narayani Namoh Namah

Beej Mantra Shri Rani Sati
Om Ayen Klin Shri Rani Satye Namah

Shri Rani Sati Dadi Jaap Mantra
Om Bhagwati Shri Rani Satye Namah

Shri Rani Sati Aarti : श्री राणी सती जी की आरती

Shri Rani Sati Chalisa : श्री राणी सती जी की चालीसा

श्री रानी सती दादी मंत्र | Shri Rani Sati Dadi Mantra

Happy Diwali Status in Hindi

Happy Diwali Wishes

Wish you Happy Diwali Friends! Diwali(Also Known as Deepavali or Deepawali) is the largest and the biggest of all Hindu festivals. Deepawali word is the combination of two words, Deep means “light” and avail “a row” to develop into “a row of lights.”  Best  Happy Diwali Status in Hindi | Diwali Hindi Quotes Today we are going to share Diwali’s wishes status and happy Diwali status. Happy Diwali Hindi Wishes SMS Greetings Quotes. Here’s are few top Happy Diwali wishes, messages, quotes, SMS and WhatsApp status that you can share with your loved ones.

आप सभी को हमारी तरफ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं| आइये देखें कुछ दीपावली के शुभकामना सन्देश| ॥ 卐 शुभ दीपावली 卐॥ ॥ ॐ शुभ दीवाली ॥

Happy Diwali in Hindi

Happy Diwali Status in Hindi | शुभ दीपावली संदेश

जगमग जगमग दीप जल उठे, द्वार द्वार आए दीपावली। 
दीपावली के इस पावन अवसर पर आपको एवं आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ। 
रोशन हो दीपक और सारा जग जगमगाऐ लिये साथ सीता मैया को राम जी हैं
आऐ हर शेहर यूँ लगे मानो अयोधया हो आओ हर द्वार हर गली हर मोड़ पर हम दीप जलाएँ॥ 
                  ॥ॐ॥दीपावली की शुभकामनाएँ 
लक्ष्मी जी विराजें आपके द्वार… सोने चांदी से भर जाए आपका घर-बार।
जीवन में आयें खुशियाँ आपार… शुभकामनाएं हमारी करें स्वीकार।
             ॥ ॐ महलक्ष्म्यै नमः ॥ 
दीयों की रौशनी से झिलमिलाता आँगन हो, पटाख़ों की गूँजो से आसमान रोशन हो ,
ऐसे आये झूम के यह दिवाली, हर तरफ खुशियों का मौसम हो। 
देवी महालक्ष्मी की कृपा से…आपके घर में हमेशा उमंग और आनंद की रौनक हो
इस पावन मौके पर आप सबको दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ॥
Devi Lakshmi Diwali
फूल की शुरुआत कली से होती है..जिन्दगी की शुरुआत प्यार से होती है
प्यार की शुरुआत अपनों से होती है..अपनों की शुरुआत आपसे होती है 
॥ॐदिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँॐ
दीये से दीये को जला कर दीप माला बनाओ , 
अपने घर आंगन को रौशनी से जगमगाओ,
आप और आप के परिवार की दीवाली शुभ और मंगलमय हो
आई आई दिवाली आई,साथ मे कितनी खुशियाँ लायी, 
धूम मचाओ मौज मनाओ आप सभी को दिवाली की बधाई. 
दीयों की रौशनी से झिलमिलाता आँगन हो, पटाख़ों की गूँजो से आसमान रोशन हो, 
ऐसे आये झूम के यह दिवाली, हर तरफ खुशियों का मौसम हो!!
दीपावली के शुभ अवसर पर याद आपकी आए, शब्द शब्द जोड़ कर देते तुम्हें बधाई।
दीवाली के इस मंगल अवसर पर, आप सभी की मनोकामना पूरी हों, 
खुशियाँ आपके कदम चूमे, इसी कामना के साथ आप सभी को दिवाली की ढेरों बधाई। 
हर घर में हो उजाला, आये ना कभी रात काली,
हर घर में मने खुशिया, हर घर में हो दिवाली 
खूब मीठे मीठे पकवान खाएं, सेहत मैं चार चाँद लगायें, 
लोग तो सिर्फ चाँद तक गए हैं, आप उस से भी ऊपर जाएँ, दीवाली की शुभकामनायें।
Subh Diwali Sandesh

Happy Diwali Quotes in Hindi

दिए की रौशनी से सब अँधेरा दूर हो जाए,
दुआ है की आप जो चाहो वो ख़ुशी मंजूर हो जाए
दिवाली आ रही है रौशनी छा रही है,
छोडो सब प्रोब्लेम्स ज़िन्दगी मुस्कुरा रही है
दिवाली पे तुम खुशिया खूब मनना,
मेरी कोई बात बुरी लगी हो तो उसे दिल से मिटाना
त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए
‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए
आई आई दिवाली आई,साथ मे कितनी खुशियाँ लायी,
धूम मचाओ मौज मनाओ, आप सभी को दिवाली की बधाई

Happy Diwali Status in Hindi

चारो और दिया जलाओ, अपने घर को खूब सजाओ,
आज की रात पटाखें जलाओ, दिवाली को अच्छी तरह मनाओ
मन राम का मंदिर हैं, यहाँ उसे विराजे रखना,
पाप का कोई भाग ना होगा, इस दिवाली बस राम को थामे रखना
जिनके मन में श्री राम हैं, भाग्य में उसके वैकुण्ठ धाम है,
उनके चरणों में जिसने जीवन वार दिया, संसार में उसका कल्याण है शुभ दिवाली
जग में सुंदर हैं दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम, 
बोलो राम राम राम बोलो श्याम श्याम श्याम दीपावली का हार्दिक शुभकामना
जीवन को जीने का रास्ता दिखाने वाले, संसार को ज्ञान सिखाने वाले,
हनुमानजी के जान से प्यारे, इस दिवाली पर भगवान श्री राम को शत शत वंदन

Happy Diwali Wishes in Hindi

देवी महालक्मी की कृपा से आपके घर में हमेशा
उमंग ओ आनद की रौनक हो, इस पावन पर्व पर आप सभी को दिवाली की शुभकामना ।।
गणेश जी, लक्ष्मी जी तुम्हारे सर पे रखे हाथ सदा,
सुख में, दुःख में, ख़ुशी में, रंज में खिलते रहो तुम फूलझड़ी की तरह !!
दिवाली पर्व है खुशियों का, उजालों का, लक्ष्मी का, इस दिवाली आपकी जिंदगी खुशियों से भरी हो, 
दुनियां उजालों से रोशन हो, घर पर माँ लक्ष्मी का आगमन हो!
आप सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!
आपको और आपके समस्त परिवार को दीपावली के पावन पर्व पर हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ!!!
सुख संपत्ति घर आवे शुभ दीपावली।
दीपावली की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं।। माँ लक्ष्मी की कृपा सदा आप पर रहे।

Happy Diwali Message Hindi Photo

Diye Diwali Wishes in Hindi
Pataka Diwali Wishes
Roshani Diwali Wishes
Har Diwali Status in Hindi
Happy Diwali Hindi

दिवाली आ रही है रौशनी छा रही है छोडो सब प्रोब्लेम्स ज़िन्दगी मुस्कुरा रही है

Diwali Diya Hindi Message
Diwali Ganesh Message
Happy Deepavali Hindi

दिए की रौशनी से सब अँधेरा दूर हो जाए, दुआ है की आप जो चाहो वो ख़ुशी मंजूर हो जाए.

Lakshmi Maa Diwali Wishes
Diwali Wishes in Hindi
Deepavali Hindi Message
Happy Diwali Wishes in Hindi
Subh Diwali Status
Diwali Quotes in Hindi

Thanks For Visiting Diwali Status And Wish you A Very Happy Diwali For Your Friends And Family Enjoy

दीपावली स्टेटस इन हिंदी, दिवाली कोट्स, स्टेटस, status, विश (wishes), estets, उद्धरण, शुभकामनायें, एसएमएस आदि जिहे आप फेसबुक, व्हाट्सप्प पर अपने दोस्त व परिवार के लोगो के साथ साझा कर सकते हैं| Diwali Wishes , Diwali Status in Hindi for Whatsapp, Diwali whatsapp status images

Effective Ways to Find Motivation to Write a Paper

Motivation to Write a Paper

It’s late at night and you are staring at a blank laptop screen watching the cursor blink on your word processor document. You have writer’s block and don’t know where to start on the essay that’s coming due soon. You’ve been putting it off day after day, waiting to find the motivation to get started but it isn’t coming. You’re watching the clock ticking away the hours until you have to be in class. What are you going to do? 

Motivation to Write a Paper

If this situation sounds familiar to you, you may be suffering from a lack of motivation due to having too many papers due. If you can’t find the motivation to get started on your next essay, there is hope! In this article, we’ll take a look at some effective ways to build motivation to write your next paper.

Why Did You Lose Motivation to Write?

Before we look at ways to get motivated, it’s important to understand some of the reasons that you are having difficulty with motivation. Understanding the reason for your lack of motivation can help you to develop the right strategy to correct the problem.

  • Lack of interest. You may not be interested in the topic, making it hard to motivate yourself to write about it.
  • Lack of confidence in your writing. You may not feel confident as a writer, which can make it hard to find the motivation to do something you don’t feel comfortable doing.
  • Lack of time management. Setting aside writing time can be challenging, and if you are a procrastinator, you might lose motivation when you can’t get ahead of the time challenge.
  • Lack of seeing the big picture. When you are too focused on the grade for a specific assignment, it can be hard to see the bigger picture of what you should be getting out of an essay. This can sap your motivation to succeed.

Get Your Motivation Back and Get Things Done!

So what should you do to regain your confidence and your motivation? Let’s take a look at some tips for finding your motivation gain.

  • Write a goal statement. Writing down your goal for your essay can give you a solid destination to aim for and help you to feel more motivated in your writing. Decide what your goal for your essay is, even if it is just to get an A, and write it down on a piece of paper. When you lack motivation, revisit your goal and remember why you are writing and what you can gain.
  • Divide the writing process into manageable parts. It can be overwhelming to try to write an essay all the way from start to finish in one gulp. By breaking down the writing process into smaller, more manageable parts, you can complete each one and feel a sense of accomplishment as you move forward to the finish line. Try separating the writing process into researching, writing a thesis statement, outlining, and writing the paper so you can have smaller chunks to work with as you develop your paper.
  • Develop a regular writing schedule. Motivation isn’t the same as inspiration, and you don’t have to wait for a random thunderbolt of fate to inspire you to start writing. Essays are fairly mechanical to produce, so developing a regular writing schedule can make producing essays a regular part of your day and make it feel less like a chore. Set aside a specific amount of time, even if it’s only 20 or 30 minutes, each day for prewriting tasks like research and outlining. By working every day toward writing your paper, there is less pressure on you as deadlines near. Finally, developing a schedule also helps you to pick the best time for you to write, whether that’s early in the morning or late at night.
  • Save the introduction for last. Many students get stuck for motivation when they can’t figure out how to start their paper. Save that task for last. Instead, use your thesis statement to help you start writing the body of the paper. When you’ve finished, you’ll have a better idea of the most effective way to start your essay.

Minimize Procrastination Asking for Writing Assistance

Every small task looks fine on its own, but then you notice that they are piling up and at that exact moment you lose all the interest. You cannot make yourself even remotely interested in starting on those tasks, as you know that most probably you won’t be able to finish on time. Does it sound familiar? We all get into the same situation — postponing tasks and later falling into a procrastinating mood. Do you know what to do? You need to find someone who will do some of your writing assignments for you. Namely, you need to delegate! When some of your tasks are delegated, you feel much more energy, believe in yourself and can deal with the rest of the assignment. So, asking for help can be a great starting point if you feel down. Also, ability to delegate is one of the most valued skills named by HRs nowadays, as it implies that you can describe a particular task, diversify assignments, and later check the result. 
If all else fails, and you need help finding a little more motivation to get started with your essay, you can always pay someone online to write a paper for you so you can see the best way to approach your topic. When you contact a company like WriterMyPaperHub.com and say “Write a paper for me”, experts in the art of writing essays will jump into action. These writers, with years of experience and advanced degrees, will create a sample paper that you can use as motivation to see exactly the right way to produce your own essay. When you see how a professional would write your paper, you will feel more confident about producing your own top-flight essay with ease.

Sundha Mata Temple

Sundha Mata Photo

Sundha Mata temple is a nearly 900-year-antique temple of Mother goddess located on a hilltop known as Sundha, placed in Jalore District of Rajasthan. It is 64 km from Mount Abu and 20 km from the metropolis of Bhinmal. At 1220 m top in the Aravalli tiers there on Sundha mountain is temple of goddesses Chamunda Devi, a totally sacred place for devotees. It is 105 km from district headquarters and 35 km. From sub divisional Bhinmal. This area lies in Raniwara Teshil within the mid-east of Malwara to Jaswantpura Road near Dantlawas village.

Sundha Mata temple houses an idol of Goddess Chamunda, placed within a huge stone. Only the head of the idol of Chamunda is worshipped at the temple. Along with Goddess Chamunda, a BhurBhuva Swaweshwar Shiva Linga is also worshiped at the temple. The design of the pillars is reminiscent of those of the Dilwara Temple in Mount Abu. This temple also features some inscriptions of historical value.

Apart from Rajasthan, lakhs of people from Gujarat, Maharashtra and Madhya Pradesh visit here every year. A nine-day fair is held here twice a year at the time of Navratras and a large crowd of devotees gather. More visitors come to the temple from thirteen to full moon of Shukla Paksha of every month.

History of Sundha Mata Temple

Sudha Mata is also known as Adhghateshwari, which means a Goddess without a torso. Here, the head of Goddess Chamunda is worshipped. As per the legend, when Lord Shiva was performing Tandav carrying the body of Sati, Lord Vishnu decided to chop the body of Sati with his Sudarshan chakra in order to calm down Lord Shiva. It is believed that Sati’s head fell at this place. Hence, this place is considered as one of the Shakti Peeths.

Sundha Mata Slogan

In the temple premises there are three historically significant inscriptions that highlight the history of the region. The first inscription is from AD 1262, which describes victory of Chauhans and the downfall of Parmaras. The second inscription is from 1326, and the third one is from 1727.

How To reach Sundha Mata Temple Jalore 

Sundha Mata Road Near Rajpura Tehsil-Jaswantpura, Sundhamata, Rajasthan 307515.

There are walk almost 2000 up stairs to reach the temple. Ropeway facility is also available here.

Near Railway Station Marwar Kori, Rajasthan 13 KM
Near Airport Udaipur Airport 215 KM Jodhpur Airport 235 KM
Near Bus Stop Bhinmal,Jalore 25 KM

Sundha Mata Photos

Sundha Mata HD Photo
Sundha Mata Image

Sundha Maa Image

Sundha Mata Image
Sundha Mata Image

Jai Sundha Mata

Sudha Mata in blue chunari
Sundha Maa in Blue

Sundha Mata Mobile Wallpaper

Sundha Mata Mobile Wallpaper
Sundha Mata Wallaper

Sundha Mata Old Photo

Sundha Mata Old Photo
Sundha Mata Old Photo

श्री सुंधा माताजी

Jai Sundha Mata
Sundha Mata

Sundha Maa

Sundha Mata Navratri
Sundha Mata Orange Chunari
Sundha Mata Darshan

Sundha Mata Temple View

Sundha Mata Temple View
Sundha Mata Temple External View

Sundha Mata Entrance Gate

Sundha Mata Entrance Gate
Sundha Parwat

Sundha Mata Ropeway

Sundha Mata Ropeway

Sai Baba Kakad Aarti | काकड आरती

Sai Baba Morning Aarti

Shirdi Sai Baba temple opens on 4 AM with morning prayers and closes down at 11:00 PM following prayers. The daily routine of the temple starts at 4 o’clock in the morning with Bhoopali, a morning song(Kakad Aarati) which occurs at 4:30 am, and closes at 11:00 o’clock in the night after the Shejarati is sung. As per rituals and traditions dating back to when Baba was still alive, four Aarti‘s are held daily (corresponding to the time of the day) inside the Samadhi Mandir. The Kakad aarti is refers to Morning Wake up Aarti.

  1. Kakad Aarti (The Morning Aarti) at 4:30 (am)
  2. Madhyan Aarti (The Afternoon Aarti) at 12:00 (pm)
  3. Dhup Aarti (The Evening Aarti) 6:30 (pm)
  4. Shej Aarti (The Night Aarti) at 10:30 (pm)
Sai Baba Kakad Aarti

Shirdi Sai Baba Slokams – Kakada Aarati Lyrics in Hindi

शिर्डी साई बाबा की सुबह की आरती : कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

श्री सच्चिदानन्द समर्ध सद्गुरु सायिनाध महराज् की जै.

1.भूपाळी (संत तुकाराम इस आरती के रचनाकार )
जोडूनियां कर चरणीं ठेविला माथा । परिसावी विनंती माझी सदुरुनाथा ।। 1 ।।
असो नसो भाव आलों तूझिया ठाया । कृपादृष्टीं पाहें मजकडे सदुरुया ।। 2 ।।
अखंडित असावें ऐसें वाटतें पायी । सांडूनी संकोच ठाव थोडासा देईं ।। 3 ।।
तुका म्हणे देवा माझी वेडीवांकुडी । नामें भवपाश हातीं आपुल्या तोड़ी ।। 4 ।।

Kakad Aarti

2. भूपाळी
उठा पांडुरंगा आतां प्रभातसमयो पातला । वैष्णवांचा मेळा गरुडपारीं दाटला ।। 1 ।।
गरुडपारापासुनी महाद्घारापर्यंत । सुरवरांची मांदी उभी जोडूनियां हात ।। 2 ।।
शुकसनकादिक नारद-तुबंर भक्तांच्या कोटी । त्रिशूल डमरु घेउनि उभा गिरिजेचा पती ।। 3 ।।
कलीयुगींचा बक्त नामा उभा कीर्तनीं । पाठीमागें उभी डोळा लावुनियां जनी ।। 4 ।।

3. भूपाळी
उठा उठा श्री साईनाथ गुरु चरणकमल दावा । आधिव्याधि भवताप वारुनी तारा जडजीवा ।। ध्रु0 ।।
गेली तुम्हां सोडुनियां भवतमरजनी विलया । परि ही अज्ञानासी तुमची भलवि योगमाया ।
शक्ति न आम्हां यत्किंचितही तिजला साराया । तुम्हीच तीतें सारुनि दावा मुख जन ताराया ।। चा0 ।।
भो साइनाथ महाराज भवतिमिरनाशक रवी । अज्ञानी आम्ही किती तव वर्णावी थोरवी ।
ती वर्णितां भागले बहुवदनि शेष विधि कवी ।। चा0 ।।
सकृप होउनि महिमा तुमचा तुम्हीच वदवावा ।। आधि0 ।। उठा0 ।। 1 ।।
बक्त मनीं सद्घाव धरुनि जे तुम्हां अनुसरले । ध्यायास्तव ते दर्शन तुमचें द्घारि उभे ठेले ।
ध्यानस्था तुम्हांस पाहुनी मन अमुचें धालें । परि त्वद्घचनामृत प्राशायातें आतुर झालें ।। चा ।।
उघडूनी नेत्रकमला दीनबंधु रमाकांता । पाहिं बा कृपादृष्टीं बालका जशी माता ।
रंजवी मधुरवाणी हरीं ताप साइनाथा ।। चा0 ।।
आम्हीच अपुले काजास्तव तुज कष्टवितों देवा । सहन करिशिल तें ऐकुनि घावी भेट कृष्ण धांवा ।।  उठा उठा0 ।। आधिव्याधि0 ।। 2 ।।

4. भूपाळी
उठा पांडुरंगा आतां दर्शन घा सकळां । झाला अरुणोदय सरली निद्रेची वेळा ।। 1 ।।
संत साधू मुनी अवघे झालेती गोळा । सोडा शेजे सुख आतां बंघु घा मुखकमळा ।। 2 ।।
रंगमंडपी महाद्घारीं झालीसे दाटी । मन उतावीळ रुप पहावया दृष्टी ।। 3 ।।
राही रखुमाबाई तुम्हां येऊं घा दया । शेजे हालवुनी जागें करा देवराया ।। 4 ।।
गरुड हनुमंत उभे पाहती वाट । स्वर्गीचे सुरवर घेउनि आले बोभाट ।। 5 ।।
झालें मुक्तद्घार लाभ झाला रोकडा । विष्णुदास नामा उभा घेऊनि कांकाड़ा ।। 6 ।।

5. अभंग
घेउनियां पंचारती । करुं बाबांसी आरती ।। करुं साई सी0 ।। 1 ।।
उठा उठा हो बांधव । ओंवाळूं हा रमाधव ।। सांई र0 ।। ओं 0 ।। 2 ।।
करुनीयां स्थीर मन । पाहूं गंभीर हें ध्यान ।। साईंचें हें0 ।। पा0 ।। 3 ।।
कृष्णनाथा दत्तसाई । जडो चित्त तुझे पायीं ।। साई तु0 ।। जडो0 ।। 4 ।।

6. कांकंड आरती
कांकडआरती करीतों साईनाथ देवा । चिनमयरुप दाखवीं घेउनि बालक-लघुसेवा ।। ध्रु0 ।।
काम क्रोध मद मत्सर आटुनी कांकडा केला । वैराग्याचे तूप घालुनी मी तो भिजवीला ।
साईनाथगुरुभक्तिज्वलनें तो मी पेटविला । तद्वृत्ती जाळुनी गुरुनें प्रकाश पाडिला ।
द्घेत-तमा नासूनी मिळवी तत्स्वरुपीं जीवा ।। चि0 ।। 1 ।।
भू-खेचर व्यापूनी अवघे हृत्कमलीं राहरसी । तोचि दत्तदेव तू शिरड़ी राहुनी पावसी ।
राहुनि येथे अन्यत्रहि तू भक्तांस्तव धांवसी । निरसुनियां संकटा दासा अनुभव दाविसी ।
न कळे त्वल्लीलाही कोण्या देवा वा मानवा ।। चि0 ।। 2 ।।
त्वघशदुंदुभीनें सारें अंबर हेंकोंदलें । सगुण मूर्ति पाहण्या आतुर जन शिरडी आले ।
प्राशुनि त्वद्घचनामृत अमुचे देहभान हरपलें । सोडूनियां दुरभिमान मानस त्वच्चरणीं वाहिले ।
कृपा करुनियां साईमाउले दास पदरिं ध्यावा ।। चि0 ।। कां0 चि0 ।। 3 ।।

7. कांकंड आरती ( पंढरीनाथा )
भक्तीचिया पोटीं बोध कांकडा ज्योती । पंचप्राण जीवें भावें ओवाळूं आरती ।। 1 ।।
ओंवाळूं आरती माइया पंढरीनाथा माझ्या साईनाथा । दोन्ही कर जोडोनी चरणीं ठेविला माथा ।। ध्रु0 ।।
काय महिमा वर्णूं आतां सांगणे किती । कोटी ब्रहमहत्या मुख पाहतां जाती ।। 2 ।।
राही रखुमाबाई उभ्या दोघी दो बाहीं । मयूरपिच्छ चामरें ढाळिति ठायींचे ठायीं ।। 3 ।।
तुका म्हणे दीप घेउनि उन्मनीत शोभा । विठेवरी उभा दिसे लावण्यगाभा ।। 4 ।। ओवाळूं 0 ।।

8. पद (उठा उठा)
उठा साधुसंत साधा आपुलालें हित । जाईल जाईल हा नरदेह मग कैंचा भगवंत ।। 1 ।।
उठोनियां पहांटे बाबा उभा असे विटे । चरण तयांचे गोमटे अमृतदृष्टि अवलोका ।। 2 ।।
उठा उठा हो वेगेंसीं चला जाऊंया राइळासी । जळतिल पातकांच्या राशी कांकंडआरती देखिलिया ।। 3 ।।
जागें करा रुक्मिणीवर, देव आहे निजसुरांत । वेंगें लिंबलोण करा दृष्ट होईल तयासी ।। 4 ।।
दारीं वाजंत्रीं वाजती ढोल दमामे गर्जती । होते कांकडआरती माइया सदगरुरायांची ।। 5 ।।
सिंहनाद शंखभेरी आनंद होतो महाद्घारी । केशवराज विटेवरी नामा चरण वंदितो ।। 6 ।।

भजन
साईनाथगुरु माझे आई । मजला ठाव घावा पायीं ।।
दत्तराज गुरु माझे आई । मजला ठाव घावा पायीं ।।
श्री सच्चिदानंद सदगुरु साईनाथ महाराज क जय ।।

9.श्री सांईनाथ प्रभाताष्टक
प्रभातसमयीं नभा शुभ रवि प्रभा फांकली । स्मरे गुरु सदा अशा समयिं त्या छळे ना कली ।।
म्हणोनि कर जोडूनी करुं अतां गुरुप्रार्थना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 1 ।।
तमा निरसि भानु हा गुरुहि नासि अज्ञानता । परन्तु गुरुची करी न रविही कधीं साम्यता ।।
पुन्हां तिमिर जन्म घे गुरुकृपेनि अज्ञान ना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 2 ।।
रवि प्रगट होउनि त्वरित घालवी आलसा । तसा गुरुहि सोडवी सकल दुष्कृतीलालसा ।।
हरोनि अभिमानही जडवि तत्पदीं भावना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 3 ।।
गुरुसि उपमा दिसे विधिहरीहरांची उणी । कुठोनि मग येई ती कवनिं या उगी पाहुणी ।।
तुझीच उपमा तुला बरवि शोभते सज्जना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 4 ।।
समाधि उतरोनियां गुरु चला मशीदीकडे । त्वदीय वचनोक्ति ती मधुर वारिती सांकडें ।।
अजातरिपु सदगुरु अखिलपातका भंजना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 5 ।।
अहा सुसमयासि या गुरु उठोनियां बैसले । वोलोकुनि पदाश्रिता तदिय आपदे नासिलें ।।
असा सुहितकारि या जगतिं कोणिही अन्य ना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 6 ।।
असे बहुत शाहणा परि न ज्या गुरुची कृपा । न तत्स्वहित त्या कळे करितसे रिकाम्या गपा ।।
जरी गुरुपदा धरी सुदृढ़ भक्तिने तो मना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 7 ।।
गुरो विनति मी करीं हृदयमंदिरीं या बसा । समस्त जग हें गुरुस्वरुपची ठसो मानसा ।।
घडो सतत सत्कृती मतिहि दे जगत्पावना । समर्थ गुरु साइनाथ पुरवी मनोवासना ।। 8 ।।

स्रग्धरा
प्रेमें या अष्टकासी पढुनि गुरुवरा प्रार्थिती जे प्रभातीं । त्यांचे चित्तासि देतों अखिल हरुनियां भ्रांति मी नित्य शांती ।।
ऐसें हें साईनाथें कथुनि सुचविलें जेविं या बालकासी । तेवीं त्या कृष्णपायीं नमुनि सविनयें अर्पितों अष्टकासी ।। 1 ।।
श्री सच्चिदानंद सदगुरु साईनाथ महाराज की जय ।।

10. पद
सांई रहम नजर करना, बच्चों का पालन करना ।। धु0 ।।
जाना तुमने जगत्पसारा, सबही झूठ जमाना ।। साई0 ।। 1 ।।
मैं अंधा हूँ बंदा आपका, मुझको प्रभु दिखलाना ।। साई0 ।। 2 ।।
दास गनू कहे अब क्या बोलूं, थक गई मेरी रसना ।। साई0 ।। 3 ।।

11. पद
रहम नजर करो, अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई ।। धु0 ।।
मैं अंधा हूँ बंदा तुम्हारा ।। मैं ना जानूं अल्लाइलाही ।। 1 ।।
खाली जमाना मैंने गमाया, साथी आखिर का किया न कोई ।। 2 ।।
अपने मस्जिद का झाडू गनू है । मालिक हमारे, तुम बाबा साई ।। 3 ।।

12. पद
तुज काय देऊं सावळ्या मी खाया तरी, मी दुबली बटिक नाम्याची जाण श्रीहरी ।
उच्छिष्ट तुला देणें ही गोष्ट ना बरी, तूं जगन्नाथ, तुज देऊँ कशी रे भाकरी ।
नको अंत मदीय पाहूं सख्या भगवंता । श्रीकांता ।
माध्यान्हरात्र उलटोनि गेली ही आतां । आण चित्ता ।
जा होईल तुझा रे कांकडा ही राउळांतरीं । आणतील भक्त नैवेघ हीनानापरी ।।

13. पद
4. श्री सदगुरु बाबासाई तुजवांचुनि आश्रय नाही, भूतली ।। धु0 ।।
मी पापी पतित धीमंदा । तारणें मला गुरुनाथा, झडकरी ।। 1 ।।
तूं शांतिक्षमेचा मेरु । तूं भवार्णवींचें तारुं, गुरुवरा ।। 2 ।।
गुरुवरा मजसि पामरा, अता उद्घरा, त्वरित लवलाही, त्वरित लवलाही,
मी बुडतों भवभय डोही उद्घरा ।। श्री सदगु0 ।। 3 ।।

Sai Baba Morning Aarti

Shirdi Sai Baba Slokams – Kakada Aarati Lyrics in English

Shri Satchitaanand Sadguru Sainaath Maharaaj ki Jai
Joduniyaa kara charanee ttevilaa mathaa
Parisawee vinanthee maajzee Pandarinathaa
Aso naso bhaava aalo tujziyaa ttaayaa
Kripaa drishtee paahe majzakade Sadgururaayaa
Akhandeeta asaave aise vaatate paayee
Sandoonee sankoch ttaava todaasaa deyee.
Tukaahmane Devaa maajzee vedeevaakudee
Naame bhavapaasaa haathee aapulyaa thondi || 1 ||

Bhupali
Uttaa Paandurangaa aataa prabhaatasamayo paatalaa
Vaishnawaancha melaa garudapaaree daatalaa
Garuda paaraapaasunee mahaadwaaraa payanta
Suravaraanchee maandee ubhee jodooniyaa haat
Suka anakaadika naarada tumbara bhaktanchyaa kotee
Trisool damaroo ghewooni wubhaa girijechaa patee
Kaleeyugeechaa bhakta Namaa ubhaa keertanee
Paatteemaage wubhee dolaa laavuniyaa Janee || 2 ||

Bhupali
Utta utta Sri Sainaathaguru charana kamala daavaa
Aadhivyaadhi bhavataapa vaarunee
taaraa jadajeevaa
Gelee tumha soduniyaa bhava tama rajanee vilayaa
Pareehi agnaanaasee tumachee bhulavi yogamaayaa
Sakthi na amhaa yatkinchitahee tijalaa saaraya
Tumheecha teete saaruni daavaa mukha jana taaraayaa
Bho Sainaatha Maharaaja bhava timiranaasaka ravee
Agnanee aamhee kitee tumhicha varnaava thoravee
Thee varnitaa bhaagale bahuvadani sesvidhi kavee
Sakripa howuni mahimaa tumachaa tumheecha
vadavaava Adhi….. Utha…..
Bhakta manee sadbhaava dharooni je tumha anusarale,
Dhyaanyasthawa te darsana tumache dwwari ubhe ttele
Dhyaanasthaa tumha asa paahunee
mana amuche ghaale,
Paree thwadvachanaamrith praasaayaate aatura jzhaale
Wughadoonee netrakamalaa deenabandhu Ramakaanta,
Paahi baa kripadrishtee baalakaa jashee maaataa
Ranjavee madhuravaanee haree taapa Sainaatha
Aamhceecha aapule karyaasthava tuja kashtavito Deva
Sahana karisil te aikuni dyaavee bhett Krishna daava
Utha…… adhivyadhi || 3 ||

Bhupali
Utta Panduranga aataa darash dhya sakala
Jzhala arunodaya sarali nidrechi vela
Sant sadhu muni avaghe jhaleti ghola
Soda sheje sukhe aata bagdu ghya mukha kamala
Rang mandapi mahadwari jzzaalise daati
Man utaaveel roop pahawaya drishti.
Rahee rakhumabai tumha yewoo dya daya
Sheje haalawunee jage kara Dev raya
Garud Hanumant ubhe paahatee wat
Swargiche surwar ghewuni aale bobhat
Zhale muktha dwar laabha zhala rokada
Vishnudas naama ubha ghewooni kakada. || 4 ||

Abhang (Aarti with Five-Wick Lamp)
Ghewuniya panchaarati, karoo Babansi aarati
Utta utta ho bandhawa. Owaaloo ha Ramadhava.
Karooniya sthira man, pahu gambhirira he dhyan
Sayeeche he dhyan pahu gambhirira he dhyan
Krishnanatha Datt Sai jado chitta tujze paayee || 5 ||

Kakad Aarti
Kaakad aarati kareeto Sainatha deva
Chinmaya roop daakhavee ghewuni balak laghu seva
Kaam krodh mad matsar aattunee kaakada kela
Vairagyache toop ghaaluni mee to bhijaveela
Sainath Guru bakti jwalane to mee petawila
Tad vryitti jaluni guroo ne prakash paadila
Dwaita tama naasooni milavi tatswaroopi jeewa
Chinmaya …. Kaakad…. Aarati….
Bhoochar khechar vyaapooni awaghe hritkamali raahasee
Tochi dattaadev tu shridi raahuni paawasee
Rahooni yethe anayatrahitoo baktaastava dhavasee
Nirasooniyaa sankata daasaa anubhawa daavisee
Na kale twalleelahee konyaa devaa waaa maanavaa
Chinmaya …. Kaakad…. Aarati….
Twat yasha dundubheene saare ambar he kondale
Sagun murti paahanyaa aatur jan Shirdee aale
Proshuni twadvachanaamrita aamuche
dehabhaan haarpale
Sodooniyaa durabhimaan maanas twaccharanee waahile
Kripa karooniya Sai maawle daas padari ghyaawaa
Chinmaya …. Kaakad…. Aarati….
Bhaktaachiya potee bodh kaakada jyoti
Pancha prana jeevebhave owaaloo aarthi
Owaaloo aaratee maajyza pandhareenaatha
majyza Sainathaa
Donhi kara jodonee charanee ttevilaa mathaa
Kaay mahima varnoo aataa sangane kitee
Kotee brahma haiyaa makha pahataa jaatee
Rahee rakhmaabaayee ubhya doghee do baahee
Mayur pincha chaamara dhaaliti thaayee che thaayee
Tuka mhane deep ghewuni unmaneet shobhaa
Vittevaree ubha dise laawanya gaabhaa. || 6 ||

Padh
Utta utta saadhu sant aapulale hit
Jaaeel jaaeel ha nardeh mag kaincha bhagawant
Uttoniya pahaante baba ubha ase vitte
Charan tayaache gomate amrit drishti awalokaa
Utta utta ho vegesee chalaa jaawoonya raawulaasee
Jalatil patakaanchya raashi kaakad aarati dekhliyaa
Jaage karaa rukhminivar, dev aahe nijasuraant
Vege limbalon karaa drisht hoeel tayasee
Daaree waajantree vaajatee dhol damaame garijatee
Hote kaakad aarati maazhyaa Sadguru rayaanchee
Simhanaad shankabheree aanand hoto mahaa dwaaree
Keshawaraaj vittewaree naamaa charan vandito || 7 ||

Bhajan
Sainath Guru maajhe aaee
Majlaa thaav dhyaavaa paayeen
Datta raaja Guru majhe aaee
Majlaa thaav dhyaavaa paayeen
Sainath Guru maajhe aaee
Majlaa thaav dhyaavaa paayeen
Shri Satchitaanand Sadguru Sainaath Maharaaj ki Jai || 8 ||

SAINATH PHABHATASTAK
Prabhaat samayeen nabhaa shubh ravi
prabha phaankalee
Smare guru sadaa ashaa samayin tya chhale naa kalee
Monhoni kar jodoonee karoon ataa Guru praarthanaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Tamaa nirasi bhaanu ha Guruhi naasi agnyaanataa
Parantu Suruchee karaa na ravihee kadhee saamyathaa
Punhaa thimir janm ghe Gurukrupeni agnaan naa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Ravi pragat howuni twarita ghaalawee aalasaa
Tasa guruhi sodawee sakal dushkriti laalasaa
Haroni abhimaanahee jadwi tatpadee bhavanaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Guroosi upama dise vidhi hareeharaanchi unee
Kuttoni mag yeie tee kavaniyaa ugee paahunee
Tuzheech upama tulaa baravi shobhate sajjanaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Samaadhi uthroniyaa Guru chalaa mashidee kade
Twadeeya vachnokti tee madhur vaaritee saankhade
Ajaataripu Sadguro akhil pathkaa bhanjanaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Ahaa susamayaasi yaa Guru uttoniyaa baisale
Vilokuni padaashrithaa tadiya aapade naasile
Asaa suhithkaaree yaa jagati konihee anya naa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Asa bahut shaahanaaa pari na jyaa Guroochi kripaa
Na tatswahit tyaa kalae karitase rikamya gapaa
Jari Gurupada dhari sudhrid bhaktineh tho manaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa
Guro vinati mee karee hridayamandiree yaa basaa
Samasth jag he guruswaroopee ttaso maanasaa
Ghado satat sathkrutee matihi deh jagatjpaavanaa
Samartha Guru Sainath puravee manovaasanaa

Preme yaa asthakaashi paduni Guruvaraa
Praarthitee je prabhaatee
Tyaanche chittasee deto akhilharooniyaan
Braanti mee nitya shaantee
Aise he Sainathe kathuneesuchvileh
jevee yaa baalakaasee
Tevee tyaa Krishnapaayee namuni
Savinayeh arpito ashtakaasee
Shri Satchitaanand Sadguru Sainaath Maharaaj ki Jai || 9 ||

PADH
Sai raham nazar karnaa Bachonkaa paalan karnaa
Sai raham nazar karnaa Bachonkaa paalan karnaa
Jaanaatumneh jagat pasaaraa Sabahee jzhoott jamaanaa
Jaanaatumneh jagat pasaaraa Sabahee jzhoott jamaanaa
Sai raham…
Mein andhaa hoon bandaa aabkaa Mujhse prabhu
dikhlaanaa
Mein andhaa hoon bandaa aabkaa Mujhse prabhu
dikhlaanaa
Sai raham…
Daas Ganu kahe ab kyaa boloo Thak gayi meree rasnaa.
Daas Ganu kahe ab kyaa boloo Thak gayi meree rasnaa.
Sai raham… || 11 ||

PADH
Raham nazar karo, ab more Sayee
Tumbin naheen mujze maa baap bhaayee
Raham nazar karo
Mein andhaa hoon banda tumhaaraa
Mein andhaa hoon banda tumhaaraa
Mein naa jaanoon Mein naa jaanoon
Mein naa jaanoon Allaah ilaahe Raham ….
Khalee jamaanaa meineh gamaayaa
Khalee jamaanaa meineh gamaayaa
Saathee aakhar kaa Saathee aakhar kaa
Saathee aakhar kaa kiyaa na koyee Raham ….
Apne maszhid ka zhaadoo Ganoo hai
Apne maszhid ka zhaadoo Ganoo hai
Maalik hamaare Maalik hamaare
Maalik hamaare tum Baabaa Sayee Raham …. || 12 ||

PADH
Tujze kai devoon Saawalyaa mee khaayaa taree hoo
Tujze kai devoon Sadguru mee khaayaa taree
Mee dubalee batik Naamyaachee jaan Shreeharee
Mee dubalee batik Naamyaachee jaan Shreeharee
Uchishta tulaa denen hee ghosht naa baree hoo
Uchishta tulaa denen hee ghosht naa baree
Toon jagannaath tujze deoon kashire bhaakaree
Toon jagannaath tujze deoon kashire bhaakaree
Nako ant madeeya pahoon sakhya bhagwantaa,
Shrikaantaa
Maadhyaahnraatra vultoni gaelee hee aatan aan chittaa
Ja hoieel tujha re kaakadaa hee raolaantaree hoo
Ja hoieel tujha re kaakadaa hee raolaantaree
Aanateel bhakt naivedya hi naanaaparee
Aanateel bhakt naivedya hi naanaaparee
Tujze kai……. || 13 ||

PADH
Shreesadguru Baabaa Saayee hoo
Shreesadguru Baabaa Saayee
Tujh waanchuni aashraya naahi bhutalee,
Tujh waanchuni aashraya naahi bhutalee
Mee paapee patit dheemanda hoo
Mee paapee patit dheemanda
Taarane malaa Gurunathaa jhadkari
Taarane malaa Sainathaa jhadkari
Toon shaantikshamechaa meroo hoo
Toon shaantikshamechaa meroo
Toon bhavaarnaveeche taaru Guruvaraa
Toon bhavaarnaveeche taaru Guruvaraa
Guruvaraa majzasi paamaraa ataan udharaa
Tvarit lavlaahee tvarit lavlaahee
Mee budato bhavbhaya dohee udharaa
Mee budato bhavbhaya dohee udharaa
Shreesadguru Baabaa…… || 14 ||

Shri Satchitaanand Sadguru Sainaath Maharaaj ki Jai

Sri Sai Darshan itself is soul stirring, & if possible all devotees should try to have KAKAD aarti darshan @ 4.30am

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Durga Devi Kavach : दुर्गा देवी कवच

Durga Devi Kavach

Shree Durga Kavacham/Devyakavacham is a part of Durga Saptshati. Devi Kavacham sloka invokes Goddess Devi as the chant mentions different names of the Devi connected to different parts of the body. Every name has a specific quality and energy. These names and forms are closely related. Chanting Durga Kavach is popular during Navratri. Devi Kavacham is a collection of 61 shlokas from the Markandeya Purana and is part of the Durga Saptashati. Durga Devi Kavach was recited by Lord Brahma to sage Markandeya. Lord Brahma praises Goddess Parvati in nine different forms of Mother Divine. Lord Brahma solicits each one to recite Devi Kavacham and seek blessings of the Devis.

Devi Kavacham (Armour of the Goddess): This Kavach (armour) protects the reader in all parts of his body, in all places and in all difficulties. This great stotram comes as a prelude to the great Devi Mahatmya. It can also be chanted separately. It is also believed that by chanting Durga Devi Kavach, one gets health benefits too. It is recommended to to recite Devi Kavacham daily to reap the benefits. It is said the person who recites Durga Devi Kavach regularly, with sincere devotion and correct pronunciation, is protected from all ills. Please find Durga Devi Kavach in Hindi and English below.

Maa Durga Devi Kavach in Sanskrit : माँ दुर्गा देवी कवच 

॥अथ देव्यः कवचम् ॥

ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,
चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम्,
श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।

ॐ नमश्चण्डिकायै

॥ मार्कण्डेय उवाच ॥

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम् ।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह ॥ १॥

॥ ब्रह्मोवाच ॥

अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥२॥

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥४॥

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥५॥

अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥६॥

न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥७॥

यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥८॥

प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
ऐन्द्री गजसमारुढा वैष्णवी गरुडासना॥९॥

माहेश्‍वरी वृषारुढा कौमारी शिखिवाहना।
लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥१०॥

श्‍वेतरुपधरा देवी ईश्‍वरी वृषवाहना।
ब्राह्मी हंससमारुढा सर्वाभरणभूषिता॥११॥

इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥१२॥

दृश्यन्ते रथमारुढा देव्यः क्रोधसमाकुलाः।
शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥१३॥

खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥१४॥

दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च।
धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै॥१५॥

नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥१६॥

त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥१७॥

दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥१८॥

उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥१९॥

एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।
जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः॥२०॥

अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥२१॥

मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥२२॥

शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी॥२३॥

नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥२४॥

दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके ॥२५॥

कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला।
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥२६॥

नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
स्कन्धयोः खङ्‍गिनी रक्षेद् बाहू मे वज्रधारिणी॥२७॥

हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुलीषु च।
नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्‍वरी॥२८॥

स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥२९॥

नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा।
पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी ॥३०॥

कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी।
जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी ॥३१॥

गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥३२॥

नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा॥३३॥

रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती।
अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी॥३४॥

पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा।
ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥३५॥

शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा।
अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥३६॥

प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥३७॥

रसे रुपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
सत्त्वं रजस्तमश्‍चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥३८॥

आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥३९॥

गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥४०॥

पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥४१॥

रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥४२॥

पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥४३॥

तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम्।
परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥४४॥

निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः।
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥४५॥

इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम् ।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥४६॥

दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः। ४७॥

नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः।
स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥४८॥

अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले।
भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः॥४९॥

सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा।
अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः॥५०॥

ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः।
ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः ॥५१॥

नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते।
मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्॥५२॥

यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले।
जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥५३॥

यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्।
तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥५४॥

देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥५५॥

लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥५६॥

इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्।

Durga Kavacham

Durga Devi Kavach in Hindi : माँ दुर्गा देवी कवच 

Please find Durga Devi Kavach in Hindi & English Lyrics with translation and meaning.

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॥ अथ श्रीदेव्याः कवचम् ॥

ॐ नमश्चण्डिकायै

Ath Shree Devya Kavacham
Om Namashchandikaaye

Kavach starts
Salutations to Chandika Devi

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॥ मार्कण्डेय उवाच ॥

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्‌।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह ॥1॥

मार्कण्डेय जी ने कहा– पितामह! जो इस संसार में परम गोपनीय तथा मनुष्यों की सब प्रकार से रक्षा करने वाला है और जो अब तक आपने दूसरे किसी के सामने प्रकट नहीं किया हो, ऐसा कोई साधन मुझे बताइये।

Maarkandeya Uvaach:
Om Yadguhyam Parmam Loke Sarva Rakshaakaram Nrinaam
Yann Kasya Chidaakhyaatam Tanme Broohi Pitamah (1)

Thus spoke Markandeya:
O Lord Brahmadeva (Grand father of all) , please tell me that which is very secret and has not been told by anyone to anybody else and which Protects all human beings in this world.

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॥ ब्रह्मोवाच ॥

अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्‌।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥2॥

ब्रह्मन्! ऐसा साधन तो एक देवी का कवच ही है, जो गोपनीय से भी परम गोपनीय, पवित्र तथा सम्पूर्ण प्राणियों का उपकार करनेवाला है. हे महामुने! आप उसे श्रवण करें.

Brahmovaach:

Asti Guhyatamam Vipra Sarva Bhootopkaarkam
Divyaastu Kavacham Punyam Tachhrinushva Mahaamune (2)

Thus spoke Bramha:

O great Brahmin, there is Devi Kavach (Armour of Goddess) which is most secret and useful to all beings. Please listen to that, O Great Sage. Durga is known by these Names:

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प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्‌॥3॥

भगवती का प्रथम नाम शैलपुत्री है, दूसरी स्वरूपा का नाम ब्रह्मचारिणी है. तीसरा स्वरूप चन्द्रघण्टा के नाम से जाना जाता है. चौथी रूप को कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है.

Prathamam Shailputri cha Dwitiyam Brahmacharini
Tritiyam Chandraghanteti Kushmaandeti Chaturthakam (3)

The first form is SHAILAPUTRI- Daughter of the King of Himalayas; Second is BRAHMACHARINI One Who observes the state of celibacy; Third is CHANDRAGANTA- One Who bears the moon around Her neck; Fourth is KOOSHMANDA- Whose Void contains the Universe

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पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्‌॥4॥

पाँचवीं दुर्गा का नाम स्कन्दमाता है.देवी के छठे रूप को कात्यायनी कहते हैं.सातवाँ कालरात्रि और आठवाँ स्वरूप महागौरी के नाम से जाना जाता है.

Panchamam Skandmaateti Shashtham Kaatyayneeti cha
Saptamam Kaalraatriti Mahagauriti Chaastamam (4)

Fifth is SKANDAMATA- Who gave birth to Karttikeya; Sixth is KATYAYANI Who incarnated to help the Devas and was born in the hermitage of Sage Kathyayana; Seventh is KALARATRI- Who is even the Destroyer of Kali; Eighth is MAHAGAURI- One Who made great penance

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नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥5॥

नवीं दुर्गा का नाम सिद्धिदात्री है। ये सब नाम सर्वज्ञ महात्मा वेदभगवान् के द्वारा ही प्रतिपादित हुए हैं। ये सब नाम सर्वज्ञ महात्मा वेदभगवान् के द्वारा ही प्रतिपादित हुए हैं

Navamam Sidhhidaatri cha Navdurgaah Prakeertitaah
Uttaanyetaani Naamaani Brahmanaiv Mahaatmana (5)

Ninth is SIDDHIDATRI- One Who grants Moksha . Those who remember You with great devotion indeed have prosperity. Undoubtedly, O Goddess of the Gods, You Protect those who remember You.

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अग्निता दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥6॥
न तेषा जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥7॥
यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धि प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥8॥

जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो, रणभूमि में शत्रुओं से घिर गया हो, विषम संकट में फँस गया हो तथा इस प्रकार भय से आतुर होकर जो भगवती दुर्गा की शरण में प्राप्त हुए हों, उनका कभी कोई अमंगल नहीं होता है.
युद्ध समय संकट में पड़ने पर भी उनके ऊपर कोई विपत्ति नहीं दिखाई देता है, उन्हे शोक, दु:ख और भय की प्राप्ति नहीं होती.
जिन्होंने भक्तिपूर्वक देवी का स्मरण किया है, उनका निश्चय ही अभ्युदय होता है. देवेश्वरि! जो तुम्हारा चिन्तन करते हैं, उनकी तुम नि:सन्देह रक्षा करती हो.

Agninaa Dahyamaanastu Shatru Madhye Gato Rane
Vishme Durgame Chaiv Bhayaartaah Sharanam Gataah (6)
Na Teshaam Jaayate Kinchidashubham Ransankate
Naapadam Tasya Pashyaami Shokdukh Bhayam Na hi (7)
Yaistu Bhaktya Smritaa Noonam Teshaam Vridhhih Prajaayate
Ye Twaam Smaranti Deveshi Rakshase Taann Sanshayah (8)

Those who are frightened, having been surrounded by the enemies on the battlefield, or are burning in fire, or being at an impassable place, would face no calamity, and would never have grief, sorrow, fear, or evil if they surrender to Durga.

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प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
ऐन्द्री गजसमानरूढा वैष्णवी गरुडासना॥9॥

चामुण्डादेवी प्रेत पर आरूढ़ होती हैं. वाराही भैंसे पर सवारी करती हैं. ऐन्द्री का वाहन ऐरावत हाथी है. वैष्णवी देवी गरुड़ को अपना आसन बनाती हैं.

Pretsansthaa tu Chamunda Vaarahi Mahishaasanaa
Aindri Gajsamaa Roodhaa Vaishnavi Garudaasana (9)

The Goddess Chamunda sits on a corpse, Varahi rides on a buffalo, Aindri is mounted on an elephant and Vaishnavi on a condor.

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माहेश्वरी वृषारूढा कौमारी शिखिवाहना।
लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥10॥

माहेश्वरी वृषभ पर आरूढ़ होती हैं. कौमारी का वाहन मयूर है. भगवान् विष्णु (हरि) की प्रियतमा लक्ष्मीदेवी कमल के आसन पर विराजमान हैं,और हाथों में कमल धारण किये हुई हैं.

Maheshwari Vrishaa Roodhaa Kaumari Shikhi Vaahanaa
Lakshmi Padmaasana Devi Padmahastaa Haripriya (10)

Maheswari is riding on a bull, the vehicle of Kaumari is the peacock, Lakshmi, the Beloved of Shri Vishnu, is seated in a lotus and is also holding a lotus in Her Hand.

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श्वेतरूपधरा देवी ईश्वरी वृषवाहना।
ब्राह्मी हंससमारूढा सर्वाभरणभूषिता॥11॥

वृषभ पर आरूढ़ ईश्वरी देवी ने श्वेत रूप धारण कर रखा है. ब्राह्मी देवी हंस पर बैठी हुई हैं और सब प्रकार के आभूषणों से विभूषित हैं.

Shwetroop Dharaa devi Ishwari Vrishvaahanaa
Braahmi Hans Samaaroodhaa Sarvaabharan Bhooshita (11)

The Goddess Ishwari, of white complexion, is riding on a bull and Brahmi, Who is bedecked with all ornaments is seated on a swan.

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इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥12॥

इस प्रकार ये सभी माताएं सब प्रकार की योग शक्तियों से सम्पन्न हैं. इनके अलावा और भी बहुत सी देवियां हैं, जो अनेक प्रकार के आभूषणों की शोभा से युक्त तथा नाना प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं.

Ityetaa Maatarah Sarvaah Sarvayog Samanvitaah
Naanaa Bharan Shobhaadhhyaa Naanaa Ratno Pashobhitaa (12)

All the mothers are endowed with Yoga and are adorned with different ornaments and jewels.

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दृश्यन्ते रथमारूढा देव्यः क्रोधसमाकुलाः।
शंख चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्‌॥13॥
खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शांर्गमायुधमुत्तमम्‌॥14॥
दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च।
धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वस॥15॥

ये सम्पूर्ण देवियाँ क्रोध में भरी हुई हैं और भक्तों की रक्षा के लिए रथ पर बैठी दिखाई देती हैं। ये शङ्ख, चक्र, गदा, शक्ति, हल और मूसल, खेटक और तोमर, परशु तथा पाश, कुन्त औ त्रिशूल एवं उत्तम शार्ङ्गधनुष आदि अस्त्र-शस्त्र अपने हाथ में धारण करती हैं। दैत्यों के शरीर का नाश करना,भक्तों को अभयदान देना और देवताओं का कल्याण करना यही उनके शस्त्र-धारण का उद्देश्य है।

Drishyante Rath Maaroodhaa Devyah Krodh Samaa Kulaah
Shankham Chakram Gadaam Shaktim Halam cha Muslaayudham (13)
Khetakam Tomram chaiv Parshum Paashamev cha
Kuntaayudham Trishulam cha Shaargam Maayudhmuttamam (14)
Daityaanaam Dehnaashaay Bhaktaanaam Bhayaay cha
Dhaarayantya Yudha Neetham Devaanaam cha Hitaay Vai (15)

All the Goddesses are seen mounted in chariots and very Angry. They are wielding conch, discus, mace, plough, club, javelin, axe, noose, barbed dart, trident, spears, strong bow and arrows made of horns. These Goddesses are wielding Their weapons for Destroying the bodies of demons, for the Protection of Their devotees and for the benefit of the Gods.

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नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
महावले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥16॥

महान रौद्ररूप, अत्यन्त घोर पराक्रम, महान् बल और महान् उत्साह वाली देवी तुम महान् भय का नाश करने वाली हो,तुम्हें नमस्कार है.

Namaste Astu Mahaaraudre Mahaaghor Paraakrame
Mahaabale Mahotsaahe Mahaabhay Vinaashini (16)
Salutations to You, O Goddess, of very dreadful appearance, of frightening valour, of tremendous strength and energy, the Destroyer of the worst fears.

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त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिन।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥17॥
दक्षिणेऽवतु वाराहीनैर्ऋत्यां खड्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥18॥

तुम्हारी तरफ देखना भी कठिन है. शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बे ,मेरी रक्षा करो. पूर्व दिशा में ऐन्द्री (इन्द्रशक्ति)मेरी रक्षा करे.अग्निकोण में अग्निशक्ति,दक्षिण दिशा में वाराही तथा नैर्ऋत्यकोण में खड्गधारिणी मेरी रक्षा करें. पश्चिम दिशा में वारुणी और वायव्यकोण में मृग पर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करे.

Traahimaam Devi Dushprekshye Shatrunaam Bhayvardhini
Praachyaam Rakshatu Maamaindri Aagneyyaam agni Devta (17)
Dakshinevatu Vaaraaahi Nairityaam Khangdhaarini
Prateechyaam Vaaruni Rakshed Vaayavyaam Mrigvaahini (18)

O Devi, it is difficult to have even a glance at You. You increase the fears of Your enemies, please come to my rescue. May Goddess Aindri (Power of Indra) Protect me from the east. Agni Devata (Goddess of Fire) from the south-east, Varahi (Shakti of Vishnu in the form of the boar) from the south, Khadgadharini ( holder of the sword) from the south-west, Varuni (The Shakti of Varuna, the rain God) from the west and Mrgavahini, (Whose vehicle is the deer) may Protect me from the north-west.

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उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेद्धस्ताद् वैष्णवी तथा ॥19॥

उत्तर दिशा में कौमारी और ईशानकोण में शूलधारिणी देवी रक्षा करे.ब्रह्माणि!तुम ऊपर( गगन )की ओर से मेरी रक्षा करो और वैष्णवी देवी नीचे (जमीन) की ओर से मेरी रक्षा करे.

Udichaam Paatu Kaumaari Aishaanyaam Shooldhaarini
Oordhwam Brahmaani Me Rakshedhastaad Vaishnavi Tathaa (19)

The Goddess Kaumari (The Shakti of Kumar, that is Karttikeya) Protect me from the north and Goddess Shooladharini from the north-east, Brahmani, (The Shakti of Brahma) from above and Vaishnavi (Shakti of Vishnu) from below, Protect me.

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एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।
जया में चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः॥20॥
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनी रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥21॥

शव को अपना वाहन बनानेवाली चामुण्डा देवी दसों दिशाओं में मेरी रक्षा करें. जया सामने से और विजया पीछे की ओर से मेरी रक्षा करे.
वामभाग में अजिता और दक्षिण भाग में अपराजिता हमारी रक्षा करे. उद्योतिनी शिखा की रक्षा करे. उमा मेरे मस्तक पर विराजमान होकर रक्षा करे.

Evam Dashdisho Rakshechaamunda Shavvaahaa
Jaya me Chagratah Paatu Vijaya Paatu Prishthatah (20)
Ajitaa Vaamparshwe Tu Dakshine Chaaparaajita
Shikha Mudyotini Rakshedumaa Moordhni Vyavasthitaa (21)

Thus Goddess Chamunda, Who sits on a corps, Protects me from all the ten directions. May Goddess Jaya Protect me from the front and Vijaya from the rear; Ajita from the left and Aparajita from the right. Goddess Dyotini may Protect the top­knot and Uma may sit on my head and Protect it.

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मालाधारी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥22॥
शंखिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले च शांकरी॥23॥

ललाट में मालाधरी रक्षा करे और यशस्विनी देवी मेरी भौंहों का संरक्षण करे.भौंहों के मध्य भाग में त्रिनेत्रा और नथुनों की यमघण्टा देवी रक्षा करे.
दोनों नेत्रों के मध्य भाग में शङ्खिनी और कानों में द्वारवासिनी रक्षा करे। कालिकादेवी कपोलों की तथा भगवती शांकरी कानों के मूलभाग की रक्षा करे

Maalaadhari Lalaate chabhruvou rakhshed Yashasvini
Trinetra cha Bhruvormadhye Yam Ghantaa cha Naasike (22)
Shankhini Chakshushor madhye Shrotrayor Dwaarwaasini
Kapolau Kaalika Rakshet Karn Mooletu Shaankari (23)

May I be Protected by Maladhari on the forehead, Yashswini on the eye-brows, Trinetra between the eye-brows, Yamaghanta on the nose, Shankini on both the eyes, Dwaravasini on the ears, may Kalika Protect my cheeks and Shankari the roots of the ears.

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नासिकायां सुगन्दा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥24॥
दन्तान्‌ रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥25॥
कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमंगला।
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥26॥
नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
स्कन्धयोः खड्गिनी रक्षेद् बाहू में व्रजधारिणी॥27॥

नासिका की देवी सुगन्धा और ऊपर के ओंठ की चर्चिका देवी रक्षा करे. नीचे के ओंठ की देवी अमृतकला तथा जिह्वा की रक्षा सरस्वती करे.
कौमारी देवी मेरे दाँतों की और चण्डिका देवी कण्ठ की रक्षा करें.चित्रघण्टा देवी गले की घाँटी और देवी महामाया तालु में रहकर हमारी रक्षा करे.
कामाक्षी देवी ठोढी की और सर्वमङ्गला मेरी वाणी की रक्षा करे. भद्रकाली ग्रीवा की और धनुर्धरी पृष्ठवंश (मेरुदण्ड) की रक्षा करे.
कण्ठ के बाहरी भाग की नीलग्रीवा और कण्ठ की नली की रक्षा नलकूबरी करे.दोनों कंधों की रक्षा खड्गिनी और मेरी दोनों भुजाओं की वज्रधारिणी रक्षा करे.

Naasikaayaam Sugandhaa Cha Uttaroshthe cha Charchika
Adhare Chaamrit Kalaa Jihvayaam cha Saraswati( 24)
Dantaan Rakshatu Kaumaari Kanthdeshe Tu Chandika
Ghantikaam Chitraghantaa cha Mahaamaaya cha Taaluke (25)
Kaamaakshi chibukam Rakshed Vaacham me Sarvamangalaa
Greevaayaam Bhadrakaali cha Prishthvanshe Dhanurdhari (26)
Neelgreeva Bahih Kanthe Nalikaam Nalkoobari
Skandhyoh Khangini Rakshed Baahu Me Vajradhaarini (27)

May I be Protected by Sugandha-nose, Charchika-lip, Amrtakala-lower lip, Saraswati-tongue, Kaumari-teeth, Chandika­throat, Chitra-ghanta-soundbox, Mahamaya-crown of the head, Kamakshi-chin, Sarvamangala-speech, Bhadrakali-neck, Dhanurdhari-back. May Neelagreeva Protect the outer part of my throat and Nalakoobari-windpipe, may Khadgini Protect my shoulders and Vajra-dharini Protect my arms.

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हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चांगुलीषु च।
नखांछूलेश्वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्वरी॥28॥।
स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥29॥
नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्वरी तथा।
पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी॥30॥
कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी।
जंघे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥31॥

दोनों हाथों की दण्डिनी और उँगलियों की रक्षा अम्बिका करे. शूलेश्वरी नखों की रक्षा करे. कुलेश्वरी कुक्षि ( पेट)में रहकर रक्षा करे.
महादेवी दोनों स्तनों की और शोकविनाशिनी देवी मन की रक्षा करे. ललिता देवी हृदय की और शूलधारिणी उदर की रक्षा करे.
नाभि की देवी कामिनी और गुह्यभाग की गुह्येश्वरी रक्षा करे. पूतना और कामिका लिंग की और महिषवाहिनी गुदा की रक्षा करे. भगवती कटि भाग में और विन्ध्यवासिनी घुटनों की रक्षा करे. सम्पूर्ण कामनाओं को देने वाली महाबला देवी दोनों पिण्डलियों की रक्षा करे.

Hastyo Dandini Rakshedambika Changuleeshu cha
Na Khaachhooleshwari Rakshet Kukshou Rakshetkuleshwari (28)
Stanau Rakshen Mahaadevi Manah Shok Vinaashini
Hridaye Lalita Devi Udare Shooldhaarini (29)
Nabhau cha Kaamini Rakshed Guhyam Guhyeshwari tathaa
Pootna Kaamika Medhhram Gude Mahishwaahini (30)
Katyaam Bhagwati rakshejjaanuni Vindhyavaasiniornar
Janghe Mahaabalaa Rakshet Sarvakaam Pradaayini (31)

May Devi Dandini Protect both my hands, Ambika-fingers, Shooleshwari my nails and may Kuleshwari Protect my belly. May I be Protected, by Mahadevi-breast, Shuladharini-abdomen, Lalita Devi-heart, Kamini-navel, Guhyeshwari-hidden parts, Pootana Kamika-reproductive organs, Mahishavasini-excretory organ.
May Goddess Bhagavati Protect my waist, Vindhyavasini-knees and the wish-fulfilling Mahabala may Protect my hips.

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गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
पादांगुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥32॥

नारसिंही दोनों घुट्ठियों की और तैजसी देवी दोनों चरणों के पृष्ठभाग की रक्षा करे.श्रीदेवी पैरों की उँगलियों में और तलवासिनी पैरों के तलुओं में रहकर रक्षा करे.

Gulfyornaarsinghi cha Paadprishthhe tu Taijasee
Paadaanguleeshu shree Rakshet Paadaadhastal Vaasini (32)

May Narashini Protect my ankles. May Taijasi Protect my feet, may Shri Protect my toes. May Talavasini Protect the soles of my feet.

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नखान्‌ दंष्ट्राकराली च केशांश्चैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्वरी तथा॥33॥

अपनी दाढों के कारण भयंकर दिखायी देनेवाली दंष्ट्राकराली देवी नखों की और ऊर्ध्वकेशिनी देवी केशों की रक्षा करे. रोमावलियों के छिद्रों की देवी कौबेरी और त्वचा की वागीश्वरी देवी रक्षा करे.

Nakhaan Danshtraakaraali cha Keshaansh chaivordhva Keshini
Romkoopeshu Kauberi Tvacham Vaageeshwari Tathaa (33)

May Danshtrakarali Protect my nails, Urdhvakeshini-hair, Kauberi-pores, Vagishwari-skin

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रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती।
अन्त्राणि कालरात्रिश्च पित्तं च मुकुटेश्वरी॥34॥
पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा।
ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥35॥

पार्वती देवी रक्त, मज्जा, वसा, माँस, हड्डी और मेद की रक्षा करे. आँतों की कालरात्रि और पित्त की मुकुटेश्वरी रक्षा करे. मूलाधार आदि कमल-कोशों में पद्मावती देवी और कफ में चूड़ामणि देवी स्थित होकर रक्षा करे. नख के तेज की देवी ज्वालामुखी रक्षा करे. जिसका किसी भी अस्त्र से भेदन नहीं हो सकता, वह अभेद्या देवी शरीर की समस्त संधियों में रहकर रक्षा करे.

Rakt majaa Vasaa maansaanyasthi Medaamsi Paarvati
Antraani Kaalraatrish cha Pittam cha Mukteshwari (34)
Padmaavati Padmakoshe Kafe Choodamnistathaa
Jwaalaamukhi Nakhjwaalaam Bhedyaa Sarvasandhishu (35)

May Goddess Parvati Protect blood, marrow of the bones, fat and bone; Goddess Kalaratri-intestines. Mukuteshwari-bile and liver.
May Padmavati Protect the Chakras, Choodamani-phlegm (or lungs), Jwalamukhi lustre of the nails and Abhedya-all the joints.

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शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्वरी तथा।
अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥36॥

हे ब्रह्माणी!आप मेरे वीर्य की रक्षा करें. छत्रेश्वरी देवी छाया की तथा धर्मधारिणी देवी मेरे अहंकार,मन और बुद्धि की रक्षा करे.

Shukram Brahmaani me Rakshechhaayaam Chhatreshvareem Tathaa
Ahankaaram Manobudhhim Rakshenme Dharmshaarini (36)

Brahmani-semen, Chhatreshwari the shadow of my body, Dharmadharini-ego, superego and intellect (buddhi).

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प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्‌।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥37॥

हाथ में वज्र धारण करने वाली वज्रहस्ता देवी मेरे प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान वायु की रक्षा करे. कल्याण से शोभित होने वाली भगवती कल्याण शोभना मेरे प्राण की रक्षा करे.

Praanaapaanau tathaa Vyaanmudaanam cha Samaankam
Vajrahastaa cha me Rakshetpraanam Kalyaanshobhana (37)

Vajrahasta-pran, apan, vyan, udan, saman (five vital breaths), Kalyanashobhana-pranas (life force).

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रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
सत्त्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥38॥

रस, रूप, गन्ध, शब्द और स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय मां योगिनी देवी रक्षा करे तथा सत्त्वगुण,रजोगुण और तमोगुण की रक्षा सदा नारायणी देवी करे.

Rase Roope cha Gandhe cha Shabde Sparshe cha Yogini
Satwam Rajastamashchaiv Rakshe Narayani Sadaa (38)

May Yogini Protect the sense organs, that is, the faculties of tasting, seeing, smelling, hearing and touching. May Narayni

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आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥39॥

वाराही आयु की रक्षा करे. वैष्णवी धर्म की रक्षा करे तथा चक्रिणी देवी मेरे यश,कीर्ति,लक्ष्मी,धन तथा विद्या की रक्षा करे.

Ayu Rakshatu Vaaraahee Dharmam Rakshatu Vaishnavi
Yashah Keertim cha Lakshmim cha Dhanam Vidyaam cha Chakrini (39)

Varahi-the life, Vaishnavi-dharma, Lakshmi-success and fame, Chakrini-wealth and knowledge.

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गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
पुत्रान्‌ रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥40॥

इन्द्राणि! आप मेरे गोत्र की रक्षा करें. चण्डिके! तुम मेरे पशुओं की रक्षा करो. महालक्ष्मी मेरे पुत्रों की रक्षा करे और भैरवी पत्नी की रक्षा करे.

Gotramindraani me Rakshetpashoonme Raksha Chandike
Putraan Rakshen Mahalakshmeer Bhaaryaam Rakshatu Bhairavi (40)

Indrani-relatives, Chandika-cattle, Mahalakshmi-children and Bhairavi-spouse

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पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥41॥

मेरे पथ की सुपथा तथा मार्ग की क्षेमकरी रक्षा करे. राजा के दरबार में महालक्ष्मी रक्षा करे तथा सब ओर व्याप्त रहने वाली विजया देवी सम्पूर्ण भयों से मेरी रक्षा करे.

Panthaanam Supathaa Rakshenmaargam Kshemkari Tathaa
Raajdwaare Mahaalakshmir Vijaya Sarvatah Sthitaa (41)

Supatha may Protect my journey and Kshemakari my way. Mahalakshmi may Protect me in the king’s court and Vijaya everywhere.

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रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥42॥

हे देवी! जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है, रक्षा से रहित है,वह सब तुम्हारे द्वारा सुरक्षित हो;क्योंकि तुम विजयशालिनी और पापनाशिनी हो.

Rakshaaheenam tu Yatasthaanam Varjitam Kavchen Tu
Tatsarvam Rakshmedevi Jayanti PaapNaashini (42)

O Goddess Jayanti, any place that has not been mentioned in the Kavach and has thus remained unprotected, may be Protected by You.

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पदमेकं न गच्छेतु यदीच्छेच्छुभमात्मनः।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥43॥
तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सार्वकामिकः।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्‌।
परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्‌॥44॥
निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः।
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्‌॥45॥

यदि अपने शरीर का भला चाहे तो मनुष्य बिना कवच के कहीं एक पग भी न जाए. कवच का पाठ करके ही यात्रा करे.कवच के द्वारा सब ओर से सुरक्षित मनुष्य जहाँ-जहाँ भी जाता है,वहाँ-वहाँ उसे धन-लाभ होता है तथा सम्पूर्ण कामनाओं की सिद्धि करने वाली विजय की प्राप्ति होती है.वह जिस-जिस अभीष्ट वस्तु का चिन्तन करता है, उस-उसको निश्चय ही प्राप्त कर लेता है. वह पुरुष इस पृथ्वी पर तुलना रहित महान् ऐश्वर्य का भागी होता है.

Padmekam Na Gachhetu Yadee chhechhubh Maatmanah
Kavchenaavrito Nityam Yatra Yatraiv Gachhati (43)
Tatra Tatraarth Laabhashcha Vijayah Saarva Kaamikah
Yam Yam Chintyate Kamam Tam Tam Praapnoti Nishchitam
Parmaishwarya Matulam Prapsyate Bhootale Pumaan (44)
Nirbhayo Jaayate Martyah Sangraameshwa Parajitah
Trailokye Tu Bhavetpujyah Kavchenaavritah Pumaan (45)

One should invariably cover oneself with this Kavacha (by reading) wherever one goes and should not walk even a step without it if one desire auspiciousness. Then one is successful everywhere and all one’s desires are fulfilled and that person enjoys great prosperity on the earth.
The person who covers himself with Kavacha becomes fearless, is never defeated in the battle and becomes worthy of being worshipped in the three worlds.

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इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्‌।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥46॥
दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः॥47॥
नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः।
स्थावरं जंगमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्‌॥48॥

कवच से सुरक्षित मनुष्य निर्भय हो जाता है.युद्ध में उसकी पराजय नहीं होती तथा वह तीनों लोकों में पूजनीय होता है.
देवी का यह कवच देवताओं के लिए भी दुर्लभ है. जो प्रतिदिन नियमपूर्वक तीनों संध्याओं के समय श्रद्धा के साथ इसका पाठ करता है,उसे दैवी कला प्राप्त होती है. तथा वह तीनों लोकों में कहीं भी पराजित नहीं होता. इतना ही नहीं, वह अपमृत्यु रहित हो, सौ से भी अधिक वर्षों तक जीवित रहता है.

Idam tu Devyaah Kavcham Devaanaam api Durlabham
Yah Pathet Prahto Nityam Trisandhyam Shradhyaan vitah (46)
Devi Kalaa Bhavetasya Trailokye shwaparaajitah
Jeeved Varshshatam Saagram pamrityu vivarjitah (47)
Nashyanti Vyadhyan Sarve Lootavisfot Kaadayah
Sthaavaram Jangam Chaiv Kritrimam Chaapi Yadvisham (48)

One who reads with faith every day thrice (morning, afternoon and evening), the ‘Kavacha’ of the Devi, which is inaccessible even to the Gods, receives the Divine arts, is undefeated in the three worlds, lives for a hundred years and is free from accidental death.
All disease, like boils, scars, etc. are finished. Moveable (scorpions and snakes) and immoveable (other) poisons cannot affect him.

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अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले।
भूचराः खेचराश्चैव जलजाश्चोपदेशिकाः॥49॥
सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा।
अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाः॥50॥
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसाः।
ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः॥51॥
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते।
मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्‌॥52॥
यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले।
जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥53॥

मकरी, चेचक और कोढ़ आदि उसकी सम्पूर्ण व्याधियाँ नष्ट हो जाती हैं. कनेर, भाँग, अफीम, धतूरे आदि का स्थावर विष, साँप और बिच्छू आदि के काटने से चढ़ा हुआ जङ्गम विष तथा अहिफेन और तेल के संयोग आदि से बनने वाला कृत्रिम विष-ये सभी प्रकार के विष दूर हो जाते हैं,उनका कोई असर नहीं होता.इस पृथ्वी पर मारण-मोहन आदि जितने आभिचारिक प्रयोग होते हैं तथा इस प्रकार के मन्त्र-यन्त्र होते हैं, वे सब इस कवच को हृदय में धारण कर लेने पर उस मनुष्य को देखते ही नष्ट हो जाते हैं. यही नहीं, पृथ्वी पर विचरने वाले ग्राम देवता, आकाशचारी देव विशेष, जल के सम्बन्ध से प्रकट होने वाले गण, उपदेश मात्र से सिद्ध होने वाले निम्नकोटि के देवता, अपने जन्म से साथ प्रकट होने वाले देवता, कुल देवता, माला, डाकिनी, शाकिनी, अन्तरिक्ष में विचरण करनेवाली अत्यन्त बलवती भयानक डाकिनियाँ, ग्रह, भूत, पिशाच, यक्ष, गन्धर्व, राक्षस, ब्रह्मराक्षस, बेताल, कूष्माण्ड और भैरव आदि अनिष्टकारक देवता भी हृदय में कवच धारण किए रहने पर उस मनुष्य को देखते ही भाग जाते हैं. कवचधारी पुरुष को राजा से सम्मान वृद्धि प्राप्ति होती है. यह कवच मनुष्य के तेज की वृद्धि करने वाला और उत्तम है.

Abhichaarani Sarvaani Mantra Yantraani Bhootale
Bhoocharaah Khecharaash Chaiv Jaljaashchop Deshikaah (49)
Sehjaa Kuljaa Maalaa Daakini Shaakini Tathaa
Antariksh charaa ghoraa Daakinyashch Mahaabalaah (50)
Grah Bhoot Pishaachaashch Yaksh Gandharv Raakshasaa
Brahm Raakshas Vetaalaah Kooshmaandah Bhairvaadayah (51)
Nashyanti Darshanttasya Kavche Hridi Sansthite
Manonnatir Bhavedra Gyaste Jo Vridhhi Karam Param (52)
Yashasaa Vardhate So api Keerti Mandit Bhootale
Japet Saptashatim Chandeem Kritva tu Kavacham Pura (53)

All those, who cast magical spells by mantras or yantras, on others for evil purposes, all bhoots, goblins, malevolent beings moving on the earth and in the sky, all those who mesmerise others, all female goblins, all yakshas and gandharvas are destroyed just by the sight of the person having Kavach in his heart.
That person receives more and more respect and prowess. On the earth he rises in prosperity and fame by reading the Kavacha and Saptashati.

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यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्‌।
तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥54॥
देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्‌।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥55॥
लभते परमं रूपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥56॥

कवच का पाठ करने वाला पुरुष को अपनी कीर्ति से विभूषित भूतल पर अपने सुयस के साथ-साथ वृद्धि प्राप्त होता है. जो पहले कवच का पाठ करके उसके बाद सप्तशती चण्डी का पाठ करता है, उसकी जब तक वन, पर्वत और काननों सहित यह पृथ्वी टिकी रहती है, तब तक यहाँ पुत्र-पौत्र आदि संतान परम्परा बनी रहती है.
देह का अन्त होने पर वह पुरुष भगवती महामाया के प्रसाद से नित्य परमपद को प्राप्त होता है, जो देवतोओं के लिए भी दुर्लभ है। वह सुन्दर दिव्य रूप धारण करता और कल्याण शिव के साथ आनन्द का भागी होता है।

Yaavad Bhoomandalam Dhatte Sashail Vankaananam
Taavat Tishthati Medinyaam Santatih Putra Pautrikee (54)
Dehaante Paramam Sthaanam Yat surairapi Durlabham
Praapnoti Purusho Nityam Mahaamaya Prasaadatah (55)
Labhate Parmam Roopam Shiven Sah Modate ॥Om ॥ (56)

His progeny would live as long as the earth in rich with mountains and forests. By the Grace of Mahamaya, he would attain the highest place that is inaccessible even to the Gods and is eternally blissful in the company of Lord Shiva.

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॥ इति देव्याः कवचं संपूर्णम्‌ ॥

॥Iti Shree Devayaah Kavcham Sampoornam॥

Thus Shree Devayaah Kavcham ends.

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माँ दुर्गा का कवच अदभुत कल्याणकारी है। दुर्गा कवच मार्कंडेय पुराण से ली गई विशेष श्लोकों का एक संग्रह है और दुर्गा सप्तशी का हिस्सा है। नवरात्र के दौरान दुर्गा कवच का जाप देवी दुर्गा के भक्तों द्वारा शुभ माना जाता है।

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Sri Durga Kavacham : श्री दुर्गा कवचम्

Shri Durga Kavach

Durga Kavacham (दुर्गा कवचम्): Durga Kavacham is considered as a powerful stotram (chant) to nullify negative vibes around you. This Durga Kavach has the ability to protect the sadhak and his family in every way. Slokas (chant) have the potential to turn around negative, repulsive vibrations into more positive and attractive vibrations. It acts as an armour in protecting one from any evil spirits.

Goddess Durga is the energy of all Gods & deities. According to Hindu Mythology chanting of Durga Kavacham regularly is the most powerful way to please Goddess Durga and get her blessing. Please find Durga Kavach in Hindi and English Lyrics below.

Durga Kavach Video

Durga Kavacham in Hindi : दुर्गा कवचम्

माँ दुर्गा का कवच अदभुत कल्याणकारी है। नवरात्र के दौरान दुर्गा कवच का जाप देवी दुर्गा के भक्तों द्वारा शुभ माना जाता है।

॥ श्रीदुर्गादेविकवचम् ॥
श्रीगणेशाय नमः ।
ईश्वर उवाच ।

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत संकटात् ॥ १ ॥

अज्ञात्वा कवचं देवि दुर्गामन्त्रं च यो जपेत् ।
न चाप्नोति फलं तस्य परं च नरकं व्रजेत् ॥ २ ॥

उमादेवी शिरः पातु ललाटे शूलधारिणी ।
चक्षुषी खेचरी पातु कर्णौ चत्वरवासिनी ॥ ३ ॥

सुगन्धा नासिकं पातु वदनं सर्वधारिणी ।
जिह्वां च चण्डिकादेवी ग्रीवां सौभद्रिका तथा ॥ ४ ॥

अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ।
हृदयं ललितादेवी उदरं सिंहवाहिनी ॥ ५ ॥

कटिं भगवती देवी द्वावूरू विंध्यवासिनी ।
महाबला च जंघे द्वे पादौ भूतलवासिनी ॥ ६ ॥

एवं स्थिताऽसि देवि त्वं त्रैलोक्ये रक्षणात्मिका ।
रक्ष मां सर्वगात्रेषु दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥

इतर श्री दुर्गा स्तोत्राणि पश्यतु ।

Shri Durga Kavach

Durga Kavacham in English Lyrics

Srunu Devi Pravakshyami Kavacham Sarva Sidhitham
Padithwa Padayithwa Cha Naro Muchyaetha Sankadath || 1 ||

Ajnathwa Kavacham Devi Durga Mantram Cha Yojabaeth
Sa Chaapnothi Balam Thasya Pancha Nagam Vrajeth || 2 ||

Umadevi Sirah Pathu Lalaadae Sooladharini
Chakshushi Kesari Paathu Karnou Cha Dwara Vasini || 3 ||

Sugandha Nasikae Paathu Vadanam Sarvadharini
Jihwacha Chandika Devi Gree Vam Soupathrika Thathaa || 4 ||

Asoka Vasini Chetho Dhow Bhahu Vajradharini
Hrudayam Lalitha Devi Udaram Simhavahini || 5 ||

Katim Bhagawathi Devi Dwavooru Vindhya Vasini
Maha Bala Cha Jange Dhwe Padhou Bhoothala Vasini || 6 ||

Evam Sthithasi Devi Thwam Trilokyae Rakshanathmika
Raksha Maam Sarva Gathreshu Durgae Devi Namosthuthe || 7 ||

Durga Kavach in Hindi Translation

श्री महादेवजी कहते है
हे देवि अब में सम्पूर्ण सिद्धियों को देने वाले दुर्गा कवच को कहता हु |
जिसके पढ़ने मात्र से या पाठ करने या कराने मात्र से मनुष्य सभी संकटो से छुट जाता है || १ ||

हे देवि इस दुर्गा कवच को जाने बिना ही जो दुर्गा मंत्र की उपासना करता है वो कभी सफल नहीं होता |
वो मंत्र कभी फलदायी नहीं होता | और उसे नरक की प्राप्ति होती है || २ ||

उमादेवी ( पार्वती ) सिर की रक्षा करे,शूलधारिणी ललाट की रक्षा करे,
खेचरी दोनों नेत्रों की रक्षा करे,चत्वरवासिनी दोनों कानो की रक्षा करे || ३ ||

सुगन्धा नासिका की रक्षा करे,सर्वधारिणी मुख की,
चण्डिका जिह्वा की रक्षा करे,सौभद्रिका ग्रीवा ( गले ) की रक्षा करे || ४ ||

अशोकवासिनी चित्तकी रक्षा करे,वज्रधारिणी दोनों भुजाओ की ( बाहु की )
ललिता ह्रदय की रक्षा करे,सिंहवाहिनी उदरप्रदेश की रक्षा करे || ५ ||

भगवती देवि कटि की रक्षा करे,विन्ध्यवासिनी दोनों उरुकि रक्षा करे,
महाबला दोनों जंघाओँ की रक्षा करे( जांघो की ),भूतलवासिनी दोनों पैरो की रक्षा करे || ६ ||

हे देवि इस प्रकार तुम रक्षारूप से इस त्रिलोक में ( त्रैलोक्य निवासिनी ) निवास करती हो |
हे दुर्गे देवि तुम मेरे शरीर मात्र की रक्षा करो | में तुम्हे नमस्कार करता हु | ( नमस्कार करती हु ) || ७ ||

Durga Kavacham in English Translation

Oh Devi, I am telling you the armour which gets you everything,
Reading or making others read, men get rid of all their sorrows.

If he who does not know , learns this Kavacham,
Along with the Durga mantram,
He would add to himself the strength,
Of the five serpents again.

Let Uma devi protect my head,
Let my forehead be protected by her who carries the soola,
Let the lion protect my eyes,
And let her who lives near the gate protect my ears.

Let she who is like incense protect my nose,
Let she who carries everything protect my face,
Let Chandika devi protect my toungue,
Let Soupathrika protect my neck.

Let Asoka vasini protect my consciousness
Let Vajra dharini protect my two arms,
Let Lalitha Devi protect my heart,
Let my belly be protected by She who rides on a lion.

Let Bhagwathi Devi protect my hips,
Let She who lives on Vindhya protect my two thighs,
Let the very strong one protect my calf,
And let she who lives on all beings protect my two feet.

Thus stands the devi who protects the three worlds,
Please protect all my body parts,
My salutations to Goddess Durga.

How to Recite Durga Kavach Path

To get the best result you should do recitation of durga Kavach early morning after taking bath and in front of Goddess Durga Idol or picture. You should first understand the Durga Kavach meaning in hindi to maximize its effect.

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