Shri Ram Dev Ji Ki Aarti : आरती श्री रामदेव जी की

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Ramdev Naetal

Ramdev Pir or Baba Ramdeoji Pir (बाबा रामदेवजी) is a local folk–deity of Rajasthan, who worked for the welfare of society irrespective of cast and creed. Muslims called him Ramdev Pir and Hindus and other communities call him Baba Ramdevji. For Ramsha Pir, there is no difference between a Hindu or Muslim

Shri Ram Dev Ji Ki Aarti : आरती श्री रामदेव जी की

Ramdevji was a Tanwar Rajput born in a village in Rajasthan,  (राजस्थान) called as Ranuja (now रामदेवरा). His father was Raja Ajmal Dev. Hindus regard him as an incarnation of Lord Krishna, while Muslims venerate him as Ramshah Pir. He is said to have had miraculous powers and his fame reached far and wide. Legend goes that five Pirs (saints) from Mecca came here to test his power and after being convinced, paid their homage to him. Since then he is venerated by Muslims also as Ram Shah Pir or Rama Peer. Ramdevji is considered as an Avtar of Lord Vishnu विष्णु)

Ramdev Ji

Shri Ram Dev Ji Ki Aarti : आरती श्री रामदेव जी की

ओउम जय श्री रामादे स्वामी जय श्री रामादे।
पिता तुम्हारे अजमल मैया मेनादे।। ओउम जय।।

रूप मनोहर जिसका घोड़े असवारी।
कर में सोहे भाला मुक्तामणि धारी।। ओउम जय।।

विष्णु रूप तुम स्वामी कलियुग अवतारी।
सुरनर मुनिजन ध्यावे जावे बलिहारी।। ओउम जय।।

दुख दलजी का तुमने भर में टारा।
सरजीवन भाण को तुमने कर डारा।। ओउम जय।।

नाव सेठ की तारी दानव को मारा।
पल में कीना तुमने सरवर को खारा।। ओउम जय।।

Shri RamDev Ji Ki Aarti : श्री रामदेव जी की आरती

पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।
घर अजमल अवतार लियो
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

गंगा जमुना बहे सरस्वती।
रामदेव बाबो स्नान करे।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

घिरत मिठाई बाबा चढे थारे चूरमो
धूपारी महकार पङे
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

ढोल नगाङा बाबा नोबत बाजे
झालर री झणकार पङे
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

दूर-दूर सूं आवे थारे जातरो
दरगा आगे बाबा नीवण करे।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

हरी सरणे भाटी हरजी बोले।
नवों रे खण्डों मे निसान घुरे।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।
पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।

जै बाबा रामदेव्

Ramdevra

Shri BABA RamDev Ji Ki Aarti : श्री बाबा रामदेवजी की आरती

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
सतयुग में बाबा विष्‍णु बन आए, मधु-कटैभ को मार गिराये
ब्रह्मा जी को आप ऊबारो, देव श्री कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
त्रेता में बाबा राम बन आए, रावण को मार गिराये
महाबीर की आप उबारो, पुरूषोत्‍तम कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
द्वापर में बाबा कृष्‍ण बन आए, कंस को मार गिराये
सुदामा को आप उबारो, वासुदेव कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
कलयुग में बाबा रामदेव बन आए, भैरों-राकस को मार गिराये
बोहिता बनिए को आप उबारो, रामपीर कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
माता मैनादे पिता अजमाल जी, बाबा संग में डाली आये
देबो साबो पुत्र थारे, नेतली कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
श्री रामपीर की आरती, जो कोई नर गाये
जन्‍म-जन्‍म के कष्‍ट मिटे, भव सागर तर जाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।
गरू नरसिंह पाण्‍डे शरणे – ”बाबा”, प्रकाश पाण्‍डे गाये
प्रेमनगर में मन्दिर तिहारा, गढ़ सिरसा कहलाये ।।

जय श्री रामदेव अवतारी, कलयुग में धणी आप पधारे ।

Shri BABA RamDev Ji Ki Aarti : श्री बाबा रामदेवजी की आरती

जय अजमल लाला प्रभु, जय अजमल लाला ।।
भक्‍त काज कलयुग में लीनो अवतारा, जय अजमल लाल ।। 1

अश्‍वनकी अवसारी शोभीत केशरीया जामा ।
शीस तुर्रा हद शोभीत हाथ लीया भाला ।। जय 2

डुब्‍त जहाज तीराई भैरव दैत्‍य मारा ।
कृष्‍णकला भयभजन राम रूणेचा वाला ।। जय 3

अंधन को प्रभु नेत्र देत है सु संपती माया ।
कानन कुंडल झील मील गल पुष्‍पनमाल ।। जय 4

कोढी जय करूणा कर आवे होंय दुखीत काया ।
शरणागत प्रभु तोरी भक्‍तन सुन दाया ।। जय 5

आरती रामदेव जी की नर नारी गावे ।
कटे पाप जन्‍म-जन्‍म के मोंक्षां पद पावे ।। जय 6

जय अजमल लाला प्रभु, जय अजमल लाला ।
भक्‍त काज कलयुग में लीनो अवतारा, जय अजमल लाल ।। 7

The majestic Shri Ramdev temple at Ramdevra, Runicha, 13 kms from Pokhran in Jaisalmer district, houses the shrine of Ramdev. He is believed to have been incarnated on earth for the benefit of humanity and was born in the house of Ajmalji in the Tomar Rajput family.

Baba Ramdev believed in the equality of all human beings, both high and low, rich and poor. He helped the down-trodden by granting them their wishes. Baba Ramdev is often depicted on horseback. His worship crosses the Hindu-Muslim divide as well as crossing the caste line since his followers include caste Hindus and the casteless Dalits.

श्री रामदेव जी का जन्म संवत् १४०९ में भाद्र मास की दूज को राजा अजमल जी के घर हुआ। उस समय सभी मंदिरों में घंटियां बजने लगीं, तेज प्रकाश से सारा नगर जगमगाने लगा। महल में जितना भी पानी था वह दूध में बदल गया, महल के मुख्य द्वार से लेकर पालने तक कुम कुम के पैरों के पदचिन्ह बन गए, महल के मंदिर में रखा संख स्वत: बज उठा। उसी समय राजा अजमल जी को भगवान द्वारकानाथ के दिये हुए वचन याद आये और एक बार पुन: द्वारकानाथ की जय बोली। इस प्रकार ने द्वारकानाथ ने राजा अजमल जी के घर अवतार लिया।

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